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#budhwar #subh budhwar #Shubh Budhwar #🙏🙏shubh budhwar🙏🙏गणेश जी महाराज, जिन्हें गणपति, विनायक और विघ्नहर्ता के नाम से भी जाना जाता है, हिंदू धर्म में सबसे अधिक पूजे जाने वाले देवताओं में से एक हैं। वे भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र हैं और उन्हें बुद्धि, समृद्धि और सौभाग्य के देवता के रूप में पूजा जाता है। गणेश जी का स्वरूप गणेश जी का स्वरूप बहुत ही अनोखा और प्रतीकात्मक है: * हाथी का सिर: यह ज्ञान, बुद्धि और शक्ति का प्रतीक है। * बड़ा पेट: यह उदारता और ब्रह्मांड को अपने अंदर समाहित करने की क्षमता का प्रतीक है। * चार भुजाएँ: ये चारों दिशाओं में उनकी शक्ति और उपस्थिति का प्रतीक हैं। वे अपने हाथों में विभिन्न वस्तुएँ धारण करते हैं, जैसे: * पाश (फंदा): यह सांसारिक मोह और बंधनों को दर्शाता है। * अंकुश: यह बुरी आदतों और अहंकार को नियंत्रित करने का प्रतीक है। * मोदक (लड्डू): यह ज्ञान और आनंद का प्रतीक है। * आशीर्वाद की मुद्रा (वरद मुद्रा): यह भक्तों को आशीर्वाद देने और उनकी इच्छाओं को पूरा करने का प्रतीक है। * एक टूटा हुआ दाँत: इसके पीछे एक कथा है कि उन्होंने महाभारत को लिखने के लिए अपनी एक दाँत को कलम के रूप में इस्तेमाल किया था। * मूषक (चूहा): उनका वाहन मूषक है, जो दर्शाता है कि वे सबसे छोटी और तुच्छ चीजों पर भी नियंत्रण रखते हैं। महत्व और पूजा गणेश जी को किसी भी शुभ कार्य या नई शुरुआत से पहले पूजा जाता है। ऐसा माना जाता है कि उनकी पूजा करने से सभी बाधाएँ दूर होती हैं और कार्य सफल होता है। इसलिए उन्हें "विघ्नहर्ता" (बाधाओं को दूर करने वाला) भी कहा जाता है। गणेश जी का सबसे प्रमुख त्यौहार गणेश चतुर्थी है, जो भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। इस दिन भक्त गणेश जी की मूर्तियों की स्थापना करते हैं, पूजा-अर्चना करते हैं और 10 दिनों तक उनका उत्सव मनाते हैं। गणेश जी की पूजा से बुद्धि, ज्ञान और विवेक प्राप्त होता है। वे कला, विज्ञान और लेखन के संरक्षक भी माने जाते हैं।
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