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#गुलज़ार शायरी #✒ गुलज़ार की शायरी 🖤 ##️⃣DilShayarana💘 #💞Heart touching शायरी✍️
गुलज़ार शायरी - बोझ साँसों का था और हम बस्ता बदलते रहे। | मंज़िल मिट्टी में थी और हम रस्ता बदलते रहे। | बोझ साँसों का था और हम बस्ता बदलते रहे। | मंज़िल मिट्टी में थी और हम रस्ता बदलते रहे। | - ShareChat