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#पुर्ण_गुरु_की_पहचान रामचरितमानस, उत्तरकांड, दोहा 92 (ख).चौपाई 3 में लिखा है : गुरु बिन भव निधि तरै न कोई, जो बिरंचि शंकर सम होई। अर्थ: गुरु के बिना मनुष्य भवसागर (जन्म मृत्यु के चक्कर) को पार नहीं कर सकता।🙏🏻 #🍧 कुछ मीठा हो जाए #💞ईमानदार साथी💏🏻 #🌄तड़के की राम राम🙏 #🎤हरियाणवी संस्कृति #🌚सर्दी की रातें🌛
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