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#subh bechar
subh bechar - 4 चाहने से हरचीज अपनी नहीं होती; हर मुस्कुराहट खुशी नहीं होती॰ अरमानतो बहुगहोते हैं भगर कभीवक्तती कभी किस्मतअच्छीनहीं होती 100 4 चाहने से हरचीज अपनी नहीं होती; हर मुस्कुराहट खुशी नहीं होती॰ अरमानतो बहुगहोते हैं भगर कभीवक्तती कभी किस्मतअच्छीनहीं होती 100 - ShareChat