हरेला उत्तराखंड का एक प्रमुख लोक पर्व है, जो मुख्य रूप से कुमाऊं क्षेत्र में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह त्योहार हरियाली, प्रकृति, कृषि और समृद्धि का प्रतीक है।
हरेला का अर्थ और महत्व
'हरेला' शब्द का अर्थ है 'हरियाली का दिन'। यह त्योहार वर्षा ऋतु के आगमन और खेती के नए चक्र की शुरुआत का प्रतीक है। इसका महत्व कई पहलुओं से जुड़ा है:
कृषि और प्रकृति से जुड़ाव: यह पर्व किसानों के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यह नई फसल की बुवाई और अच्छी उपज की कामना का दिन है।
पर्यावरण संरक्षण: हरेला प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने का संदेश देता है। इस दिन बड़े पैमाने पर पौधारोपण भी किया जाता है।
धार्मिक महत्व: हरेला को भगवान शिव और माता पार्वती के मिलन का प्रतीक भी माना जाता है। इस दिन उनकी पूजा की जाती है।
पारिवारिक और सामाजिक एकता: यह त्योहार परिवार और समुदाय को एक साथ लाता है, लोग एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं और बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लेते हैं।
हरेला कैसे मनाया जाता है?
हरेला की तैयारियां लगभग दस दिन पहले से शुरू हो जाती हैं:
बीज बोना: त्योहार से लगभग 9-10 दिन पहले, घर के सबसे बुजुर्ग सदस्य या महिलाएं मिट्टी के बर्तन या बांस की टोकरी में पांच या सात प्रकार के अनाज (जैसे जौ, गेहूं, मक्का, भट्ट, सोयाबीन, गहट) के बीज बोते हैं।
देखभाल: इन बोए गए बीजों को नियमित रूप से पानी दिया जाता है और उनकी देखभाल की जाती है, ताकि वे हरे-भरे अंकुरित हो सकें।
हरेला काटना: त्योहार के दिन, इन अंकुरित हरे पौधों को काट लिया जाता है, जिन्हें "हरेला" कहा जाता है।
पूजा और आशीर्वाद: इन हरेला को देवी-देवताओं को अर्पित किया जाता है और घर के बुजुर्ग सदस्यों द्वारा परिवार के अन्य सदस्यों के सिर पर रखकर आशीर्वाद दिया जाता है। माना जाता है कि हरेला जितना घना और हरा होता है, उतनी ही अच्छी फसल होने की संभावना होती है।
पौधारोपण और उत्सव: इस दिन विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं और लोग पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हैं।
हरेला कब मनाया जाता है?
हरेला वर्ष में तीन बार आता है, लेकिन श्रावण मास (जुलाई के मध्य) में मनाया जाने वाला हरेला सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। यह कर्क संक्रांति के दिन पड़ता है और मॉनसून की शुरुआत का प्रतीक होता है। इस साल, 16 जुलाई, 2025 को हरेला का त्योहार मनाया जा रहा है।
यह त्योहार उत्तराखंड की समृद्ध संस्कृति और प्रकृति के साथ गहरे जुड़ाव को दर्शाता है। #हरेला #🗞️16 जुलाई के अपडेट 🔴 #aaj ki taaja khabar #🗞breaking news🗞 #🗞️🗞️Latest Hindi News🗞️🗞️


