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#Gulzaar ki shayari
Gulzaar ki shayari - भी बहुत है मगर, हर हुनर झुकने का मुझमें चौखट पर सजदा करूं , ये मुझे गवारा नहीं। भी बहुत है मगर, हर हुनर झुकने का मुझमें चौखट पर सजदा करूं , ये मुझे गवारा नहीं। - ShareChat