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"पिता का आख़िरी सपना" रवि एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम करता था। *अच्छा पैसा, बढ़िया lifestyle, branded कपड़े, AC ऑफिस और weekend पार्टियाँ* — ज़िंदगी सेट लगती थी। लेकिन उसके पिता – श्यामलाल जी – गाँव में ही रहते थे। सीधे-सादे, पुराने ख्यालों के… हर बार रवि से कहते, > “बेटा, एक बार गाँव आ जा… तुझसे मिलने को मन करता है…” *रवि हर बार बहाना बना देता:* > “पापा, टाइम नहीं है… मीटिंग है… थोड़ा बिज़ी हूँ…” वो नहीं आया। पिता को शुगर, BP सब था — लेकिन रवि को लगा, > “चलो, बाद में देख लेंगे…” *एक दिन फोन आया –* > “पापा अब नहीं रहे…” रवि भागा गाँव… घर में चुप्पी… दीवार पर पिता की तस्वीर… और पास में एक पुराना लिफ़ाफ़ा… *लिफ़ाफ़े में था एक चिट्ठी – जो शायद उन्होंने मरने से पहले लिखी थी।* ✉️ *चिट्ठी में लिखा था:* *> "बेटा, तुझसे मिलने का मन तो बहुत करता था…* पर तू बड़ा हो गया है, अब तेरे पास वक़्त नहीं होगा। जब तेरा समय हो, तब मेरी क़ब्र पर आ जाना। *तुझे देखने की ख्वाहिश वहीं पूरी कर लूंगा…"* रवि फूट-फूट कर रो पड़ा… जिस इंसान ने उसे सब कुछ बनाया, वो बस थोड़ा सा वक़्त माँग रहा था… और वो भी न दे सका। *🧠 इस कहानी से हमें क्या सीख मिलती है?* 1. ✅ *माता-पिता हमेशा कुछ "बड़ा" नहीं माँगते – वो सिर्फ़ हमारी मौजूदगी चाहते हैं।* 2. ✅ *रिश्तों को वक्त दो… वरना एक दिन पछताना पड़ेगा।* 3. ✅ *काम, पैसा, तरक्की सब कुछ फिर से पाया जा सकता है — लेकिन माता-पिता दोबारा नहीं मिलते।* 4. ✅ *"बाद में देख लेंगे" कभी-कभी बहुत देर कर देता है…* *🪔 संक्षेप में संदेश:* > "जिन्होंने तुम्हें बोलना सिखाया, कभी उनके चुप हो जाने से पहले… बस एक बार सुन लो।" #Sunday Story
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