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#मुंबई से #प्रकाशित #सामना में #नियमित #भोजपुरिया ##कॉलम में प्रकाशित मेरा #व्यंग्य। #सामना #परिवार एवं आदरणीय #संपादक बड़े भाई #अनिल #तिवारी जी का #विशेष #व्यंग्य #व्यंग्य
व्यंग्य - सामना आपक कविताई के इश्क आ ऑँख के कोना से ओकरा के देखत मुरकुरा के आगे बढ भोजपुरिया व्यंग्य जाले, बाकि जब ई कृत्य भाभीजी के दिव्य नजर में आवेला तब बेलन प्रहार शुरू हो जाला। एही से कुछ दिन ले कविता के लय अउरी तुक बदल जाला। चहुँओर शांति हो शांति हो भदोही प्रभुनाथ शुक्ल जाला। बाकि जल्दिये उनकर कविता क्रांति लौट आवत हो। नत्थूलाल   हमनी क कवि लोग में इहे हऊवें । पडोसी  बड़   बेमारी  Haf' दिन्रात ओनकर कविताई  अगर लोग 3]|/ चलत रहत हों।ऊ गदहा के কণিনা না सुनावे  আনাত ম আপন কনিনা;  शिकार  "FIlrr '1va ಪ जाले। अइसना में हमनी सुनावे  ulel ' H chdell के  पड़ोसी के लागेला | जवना के नतीजा ٢٩٧ ٢ ई होला कि॰ आपन कर्तव्य निभावल  कवता Uech मुर्गा के पाठ   सुनला  पर मुलाएनी  UITI :ITIIT भोरऐो गइल होखे के शम के मोसम में गरम पकोडा हो जाला आऊ बांग करे खाइल   पसंद at lal लागेला। मोहल्ला के बहुत हमनी के पकोडा खाए लोग अलार्म लगावल बद के मन करेला त बिना क देले बाड़े। नत्यूलाल के कवनो डर के कवि अउरी कवित्ता पाठ सुन के ऊ लोग  पडोसी नत्यूलाल  नींद सेजाग जाला। कबो- कविखाना पहुंच   जानी कबो लोग आधी रात के भाभीजी जा।  तुरते भोर समडा बैठेला। पकौड़ा तल के गरम चाय कवि नत्थूलाल के कवित्ता के अतना अपच हो जाला आवे के आदेश दिहल जाला आ हमनी के नत्थूलाल के कि जब भो मन करेला त अपना कमरा बाहर निकल के कविता के आनंद लेबे लागेनी जा। बाकि हम ताली बजावल ओहिजा से गुजरत कवनो लइको के सुंदरता के बखान करे भुलाएनी। काहे कि सतर्क श्रोता के अउरी वाह ्वाह करब ना लागेला। उनकर ई हरकत कबो जूती खियाई देला अउर कबो हमेशा एह बात के ध्यान राखे के चाहीं कि ताली कवि खातिर बूस्टर डोज के काम करेला| ओकरा बूस्टर डोज तब मिलेला बूस्टर डोज हौ। एकरा चलते कवि के प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत जब कवनो सुंदर मेहरारू ओकरा कविता से मंत्रमुग्ध हो जाले  अउरी कवि के भोतर कविता कबो खतम ना होला। ह। जाला Hindi Edition Saamana Jul 2025 Page No 15 9 सामना आपक कविताई के इश्क आ ऑँख के कोना से ओकरा के देखत मुरकुरा के आगे बढ भोजपुरिया व्यंग्य जाले, बाकि जब ई कृत्य भाभीजी के दिव्य नजर में आवेला तब बेलन प्रहार शुरू हो जाला। एही से कुछ दिन ले कविता के लय अउरी तुक बदल जाला। चहुँओर शांति हो शांति हो भदोही प्रभुनाथ शुक्ल जाला। बाकि जल्दिये उनकर कविता क्रांति लौट आवत हो। नत्थूलाल   हमनी क कवि लोग में इहे हऊवें । पडोसी  बड़   बेमारी  Haf' दिन्रात ओनकर कविताई  अगर लोग 3]|/ चलत रहत हों।ऊ गदहा के কণিনা না सुनावे  আনাত ম আপন কনিনা;  शिकार  "FIlrr '1va ಪ जाले। अइसना में हमनी सुनावे  ulel ' H chdell के  पड़ोसी के लागेला | जवना के नतीजा ٢٩٧ ٢ ई होला कि॰ आपन कर्तव्य निभावल  कवता Uech मुर्गा के पाठ   सुनला  पर मुलाएनी  UITI :ITIIT भोरऐो गइल होखे के शम के मोसम में गरम पकोडा हो जाला आऊ बांग करे खाइल   पसंद at lal लागेला। मोहल्ला के बहुत हमनी के पकोडा खाए लोग अलार्म लगावल बद के मन करेला त बिना क देले बाड़े। नत्यूलाल के कवनो डर के कवि अउरी कवित्ता पाठ सुन के ऊ लोग  पडोसी नत्यूलाल  नींद सेजाग जाला। कबो- कविखाना पहुंच   जानी कबो लोग आधी रात के भाभीजी जा।  तुरते भोर समडा बैठेला। पकौड़ा तल के गरम चाय कवि नत्थूलाल के कवित्ता के अतना अपच हो जाला आवे के आदेश दिहल जाला आ हमनी के नत्थूलाल के कि जब भो मन करेला त अपना कमरा बाहर निकल के कविता के आनंद लेबे लागेनी जा। बाकि हम ताली बजावल ओहिजा से गुजरत कवनो लइको के सुंदरता के बखान करे भुलाएनी। काहे कि सतर्क श्रोता के अउरी वाह ्वाह करब ना लागेला। उनकर ई हरकत कबो जूती खियाई देला अउर कबो हमेशा एह बात के ध्यान राखे के चाहीं कि ताली कवि खातिर बूस्टर डोज के काम करेला| ओकरा बूस्टर डोज तब मिलेला बूस्टर डोज हौ। एकरा चलते कवि के प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत जब कवनो सुंदर मेहरारू ओकरा कविता से मंत्रमुग्ध हो जाले  अउरी कवि के भोतर कविता कबो खतम ना होला। ह। जाला Hindi Edition Saamana Jul 2025 Page No 15 9 - ShareChat