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#कला #राजस्थानी कला थेवा कला
कला - थेवा कला प्रतापगढ में हरे रंग को आधार बनाकर काँच की वस्तुओं पर सोने का कलात्मक चित्रांकन थेवा कला कहलाती है।  पूर्व देवगढ (प्रतापगढ ) में इस कला का जन्म हुआ  लगभग ४०० वर्ष डसक प्रवर्तक कलाकार नाथूजी सोनी थे। थेवा  नाम की उत्पत्ति इस कला के निर्माण की दो मुख्य प्रक्रियाओं  থানো 3ঁ 'নাভা' ম িল कर हुई है। में हरे, लाल नीले पीले काँच पर सोने का काम, चाँदी की रेखाएँ इस कला उभारना , चित्र व आकृतियाँ बनाना आदि कार्य किया जाता है। यह कला राजसोनी परिवार की धरोहर है,जिसे सोनी परिवार ने ट्ेड सिक्रेट रखा है। महेश सोनी , रामप्रसाद सोनी, रामविलास सोनी, बेनीराम, जगदीश थेवा कला के राज्य एवं राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त कलाकार है। थेवा कला प्रतापगढ में हरे रंग को आधार बनाकर काँच की वस्तुओं पर सोने का कलात्मक चित्रांकन थेवा कला कहलाती है।  पूर्व देवगढ (प्रतापगढ ) में इस कला का जन्म हुआ  लगभग ४०० वर्ष डसक प्रवर्तक कलाकार नाथूजी सोनी थे। थेवा  नाम की उत्पत्ति इस कला के निर्माण की दो मुख्य प्रक्रियाओं  থানো 3ঁ 'নাভা' ম িল कर हुई है। में हरे, लाल नीले पीले काँच पर सोने का काम, चाँदी की रेखाएँ इस कला उभारना , चित्र व आकृतियाँ बनाना आदि कार्य किया जाता है। यह कला राजसोनी परिवार की धरोहर है,जिसे सोनी परिवार ने ट्ेड सिक्रेट रखा है। महेश सोनी , रामप्रसाद सोनी, रामविलास सोनी, बेनीराम, जगदीश थेवा कला के राज्य एवं राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त कलाकार है। - ShareChat