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|| सुभाषित || #Sanskrit #hindi #sagarjhaclasses
Sanskrit - SAOA# JHA SUBSCRIBE CASSES तिष्ठन्ति स्वयमातपे कुर्वन्ति छायामन्यस्य फलान्यपि परार्थाय वृक्षाः सत्पुरुषा इव | (सुभाषित) धूप में खड़े रहते हैं को तो छाया देते हैं॰ परंतु स्वयं कडी 43 =&` दूसरों  उनके फल भी दूसरों के लिए होते हैं, अपने लिए नहीं। उसी प्रकार अच्छे मनुष्य भी स्वयं कठिनाई सहकर दूसरों का कल्याण करते हैं। उन्होंने जो कुछ भी अर्जित दूसरों को ही दे देते हैं  किया है॰वे उसे SAOA# JHA SUBSCRIBE CASSES तिष्ठन्ति स्वयमातपे कुर्वन्ति छायामन्यस्य फलान्यपि परार्थाय वृक्षाः सत्पुरुषा इव | (सुभाषित) धूप में खड़े रहते हैं को तो छाया देते हैं॰ परंतु स्वयं कडी 43 =&` दूसरों  उनके फल भी दूसरों के लिए होते हैं, अपने लिए नहीं। उसी प्रकार अच्छे मनुष्य भी स्वयं कठिनाई सहकर दूसरों का कल्याण करते हैं। उन्होंने जो कुछ भी अर्जित दूसरों को ही दे देते हैं  किया है॰वे उसे - ShareChat