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Shikayat hai kisi se…#shikayat
shikayat - वक़्त गुज़र जाता है, यादे रह जाती है, द्दिलाती " कुछ अच्छा हुआ पर बुरा ही याद 81 तकलीफ ये नहीं तुम वजह हाो उसकी , दर्द तो बस इतना हैं, देने की वजह क्या थीं। हमने किया था, না য়ালন ना सही राह थी, तुम्हारी अगर कुछ सीखाना चाहते थे, तो राहे बहुत सारी थी। शिकायत नहीं करेंगे आपसे , हमने भी आपकी हर बात मानी थी। गलती शायद यही थी, अपना सोच के बात निभाई थी। आकांक्षा वक़्त गुज़र जाता है, यादे रह जाती है, द्दिलाती " कुछ अच्छा हुआ पर बुरा ही याद 81 तकलीफ ये नहीं तुम वजह हाो उसकी , दर्द तो बस इतना हैं, देने की वजह क्या थीं। हमने किया था, না য়ালন ना सही राह थी, तुम्हारी अगर कुछ सीखाना चाहते थे, तो राहे बहुत सारी थी। शिकायत नहीं करेंगे आपसे , हमने भी आपकी हर बात मानी थी। गलती शायद यही थी, अपना सोच के बात निभाई थी। आकांक्षा - ShareChat