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#मेरी कविता
मेरी कविता - यकीन न करो यह मेरा है ।। युग आवारा हैं ।l खिलौना समझकर खेलेगा लोग तुम्हें I| यह युग आवारा हैं ।l यकीन न करो यह मेरा है ।। युग आवारा हैं ।l खिलौना समझकर खेलेगा लोग तुम्हें I| यह युग आवारा हैं ।l - ShareChat