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मेरी कविता। #mai yek kavita likhi thi
mai yek kavita likhi thi - इसी बारिश का मुझे इंतज़ार था, मैं इतना बेचैन था, बेकरार था। जाने कब यह बरसात आएगी , मुझे भिगोकर यह जाएगी| जब से गर्मी से मेरा बदन जल रहा, वो बरसात की बूंदें मांग रहा।  प्यासे कोयल और मोर अपनी आवाज़ से बरसात के आने का इशारा दे रहे हैं, की गरज से मानो उसमें जमीं बूंदें নালী गिरने को तरस रही हैं। हवाएं भी अब इशारे दे रही हैं, वो बता रही हैं ऐसे कि अब बरसात आ रही है। घर से बाहर निकले नन्हे- मुन्ने बच्चे, की बूंदों को गिरते देख वो नाचें। সংসান आया मौसम सावन का, गीत बज रहा है सावन का। गर्मी की तपन कम हुई, बयार सावन की अब आई। इसी बारिश का मुझे इंतज़ार था, मैं इतना बेचैन था, बेकरार था। जाने कब यह बरसात आएगी , मुझे भिगोकर यह जाएगी| जब से गर्मी से मेरा बदन जल रहा, वो बरसात की बूंदें मांग रहा।  प्यासे कोयल और मोर अपनी आवाज़ से बरसात के आने का इशारा दे रहे हैं, की गरज से मानो उसमें जमीं बूंदें নালী गिरने को तरस रही हैं। हवाएं भी अब इशारे दे रही हैं, वो बता रही हैं ऐसे कि अब बरसात आ रही है। घर से बाहर निकले नन्हे- मुन्ने बच्चे, की बूंदों को गिरते देख वो नाचें। সংসান आया मौसम सावन का, गीत बज रहा है सावन का। गर्मी की तपन कम हुई, बयार सावन की अब आई। - ShareChat