ShareChat
click to see wallet page
search
#भक्ति भावना #🕉 ओम नमः शिवाय 🔱 #🙏🌺सावन का पहला सोमवार🌺🙏 #सावन का पहला सोमवार 🌙🌾🌞 #सावन का पहला सोमवारी। गुट्टा गुड्डी का खेल बंद करो, ढंग की पूजा करो कांवड़ यात्रा, जिसका न गीता में वर्णन है और न वेद में; इसलिए यह एक शास्त्र विरुद्ध साधना है और गीता अध्याय 16 श्लोक 23 के अनुसार शास्त्र विरुद्ध साधना से कोई लाभ नहीं होता। बल्कि इससे पाप ही होता है। अमरग्रंथ साहिब (सूक्ष्मवेद) में बताया गया है: अवघारख का अंग 287 बजर दंड कर दम कें तोड़ें, वहां तो जीव मरत हैं करोड़। निसवासर जो धूनी फुर्के, तार्म जीव असंखी सूर्क। 110.3911 तीर्थ बाट चले जो प्राणी, सो तो जन्म जन्म उल्लझानी। जाय तीर्थ पर कर है वानं, आवत जात जीव मरे अरवानं। 1104011 परबी लेन जात है दुनियां, हमारा ज्ञान किन्हे नहीं सुनियां। गोते गोते पड़ है भारं, गंगा जमुना गए किदारं ।।1041।। लोहागिर पौहकर की आशा, अनंत कोटि जीव होत विनाशा। पाती तोड़ चढ़ाव अंधे, जिनके कदे न कर्ट है फंदे।।1042।। गंगा काशी गया प्रयागू, बहुर जाय द्वारा ले दागू। हरि पैड़ी हरिद्वार हमेशा, ऐसा ज्ञान देत उपदेशा। 11043।। जा गुरुया की गर्दन भारं, जो जीव भ्रमावे आचार विचारे। पिण्ठ पिहोवे बहुतक जाही, बदरी बोध सुनों चित लाहीं।।1044।। सरयू कर अस्नान हजूमं, अनंत कोटि जीव घाली धूमं। पिण्ड प्रदान मुक्ति नहीं होई, भूत जूनी छूटत है लोई।।104511 गरीब, भूत जूनी जहां छूटत है, पिण्ड प्रदान करत। गरीबदास जिंदा कहे, नहीं मिले भगवंत। 1104611 जगन्नाथ जो दर्शन जाहीं, काली प्रतिमा भवन के माहीं। वह जगदीश न पावे किसही, जगन्नाथ जो घट घट बसही। 1104711 गोमति गोदावरी न्हाहीं, अठसठ तीर्थ का फल पाहीं। नहीं पूजे जिन संत सुजाना, जाके मिथ्या सब अस्नाना। 1048।। कोटि या अश्वमेध कराही, संत वरण रज सम नाहीं तुलाहीं। कोटि गऊ नित दान जु देहीं, एक पलक संतन परबी लेहीं। 1104911 धूप दीप और योग युक्ता, कोटि ज्ञान क्यों कथहीं मिथ्या। जिन जान्या नहीं पद का भेऊ, जाके संत न रहे बटेऊ।।10501। तीर्थ व्रत करें जो प्राणी, तिनकी छूटत है नहीं खानी। चौदस नौमी द्वादश बरतं, इन से जम जौरा नहीं डरतं ।।1051।। करे एकादशी संजम सोई, करवा चौथ गदहरी होई। आठ सातै करे कंदूरी, सो तो हों नीच घर सूरी।।10521। गरीब, आन धर्म जो मन बसे, कोई करो नर नार। गरीबदास जिंदा कहे, सो जाशी जम द्वार। 1105311 कहै जो करूवा चौथ कहानी, तास गदहरी निश्चय जानी। दुर्गा देवी भैरव भूता, रात जगावे होय जो पूता ।11054।। करे कड़ाही लपसी नारी, बूडे वंश सहित घरबारी। दुर्गा ध्यान पड़े जिस बगडं, ता संगति बूड़े सय नगरं ।।105511 ये सब हमरे ख्याल मुरारी, हम नहीं नाचे दे दे तारी। हम से ही मेरव क्षेत्र खलीला, आदि अंत सब हमरी लीला।।1056।। हम नहीं वैष्णव धर्म चलाया, हम नहीं तीरथ व्रत बनाया। हम से ही जप तप संजम शाखा, हम ही चार वेद सब भाखा। 11057।। गरीब, तीर्थ बाट चलै जो प्राणी । सोतो जन्म-जन्म उरझानी ।। संत रामपाल जी महाराज जी से निःशुल्क नामदीक्षा व निःशुल्क
भक्ति भावना - ShareChat