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#मेरी कविता
मेरी कविता - "माँ-पिताः दो नाम, एक आत्मा" माँ अलग है॰पिता अलगहै॰ परजब भी बच्चा रोता है दोनों की आँखें एक साथ भर आती हैं। माँकी ममता में जो मिठास है॰ पिता की चुप्पी में चही विश्वास है। माँ थाली में परोसती है प्यार पिता पसीने से भरता है घरका संसार। माँकी लोरी नींद लाती है॰ पिता की थकान चैन दिलाती है। माँ दुआ है॰ पिता साया, एक बिना दूसरा अधूरा है साया। एक जन्म देती है॰ दूसरा ज़िंदगी सजाता है, माँ पिता दो नाम नहीं ये तो एक ही खुदा के दो हाथ होते हैं। गिरता है Gaeal माँ दौड़ती है॰ पिता चुपचाप आगे बढ़ाता है उँगली | दुनिया कहती है माँ महान है॰ हम कहते हैं "माँ पिता दोनों भगवान हैं!" बाप पेज "माँ-पिताः दो नाम, एक आत्मा" माँ अलग है॰पिता अलगहै॰ परजब भी बच्चा रोता है दोनों की आँखें एक साथ भर आती हैं। माँकी ममता में जो मिठास है॰ पिता की चुप्पी में चही विश्वास है। माँ थाली में परोसती है प्यार पिता पसीने से भरता है घरका संसार। माँकी लोरी नींद लाती है॰ पिता की थकान चैन दिलाती है। माँ दुआ है॰ पिता साया, एक बिना दूसरा अधूरा है साया। एक जन्म देती है॰ दूसरा ज़िंदगी सजाता है, माँ पिता दो नाम नहीं ये तो एक ही खुदा के दो हाथ होते हैं। गिरता है Gaeal माँ दौड़ती है॰ पिता चुपचाप आगे बढ़ाता है उँगली | दुनिया कहती है माँ महान है॰ हम कहते हैं "माँ पिता दोनों भगवान हैं!" बाप पेज - ShareChat