सेक्स एक औरत के शरीर को पूर्ण करता हैं सही उम्र में यदि संभोग ना हो तो एक औरत का शरीर उभर नहीं पाता...
क्योंकि रति क्रिया के समय जब एक महिला संतुष्टि की प्राप्ति करती है तब उसके शरीर में कुछ ऐसे हार्मोन बनते हैं जो मासिक धर्म की समस्या चेहरे को चमक
उदर समस्या का भी भी समाधान करते हैं
कॉलेज खत्म होने के बाद मेरी उम्र महज 22 साल थी। पापा, ताऊजी और मम्मी मेरे लिए लड़का देखने में जुटे थे। कई रिश्ते आए लेकिन हर बार एक ही वजह से बात बिगड़ जाती — लड़का सरकारी नौकरी वाला नहीं है।
माँ रोज पूजा-पाठ और टोटके करती रहतीं। एक दिन मैंने हिम्मत करके कहा,
"माँ, ये सब टोटकों से कुछ नहीं होता। जो होना होगा, वो होगा।"
माँ नाराज़ हो गईं —
"शादी अपने वक्त पर ही अच्छी लगती है बेटा। बहुत कहने वाली नहीं होती लड़कियां!"
छह महीने बाद एक लड़का मिला, नाम था विक्रम, सरकारी विभाग में क्लर्क था। उम्र 36 साल — मुझसे 14 साल बड़ा। बस! पापा-ताऊजी ने तुरंत हां कह दी। मम्मी भी खुश थीं — अब सरकारी दामाद जो मिल रहा था।
शादी हो गई। पहली रात कुछ नहीं हुआ। मैंने सोचा शायद थके होंगे। हफ्तों बीत गए। तब मैंने खुद हिम्मत की और उनसे नज़दीक होने की कोशिश की, लेकिन... तभी वो मुझसे अलग हो गए। बहुत शर्मिंदा होकर कमरे से बाहर चले गए।
मैंने धीरे से पूछा —
"क्या मैं आपको पसंद नहीं हूं?"
विक्रम ने हाथ पकड़कर कहा —
"ऐसी बात नहीं है... मैं 2 साल से इलाज करा रहा हूँ, पर ठीक नहीं हो रहा।"
मेरा दिल बैठ गया।
डॉक्टर से सलाह ली तो उन्होंने बताया कि उम्र और काम के तनाव की वजह से शारीरिक कमजोरी आ गई है, नसों की सक्रियता कम हो चुकी है। और यह बीमारी जल्दी ठीक भी नहीं होती।
मैंने उन्हें कभी ताना नहीं मारा, कभी अपमानित नहीं किया। लेकिन मेरी उम्र सिर्फ 23 साल थी। शरीर और मन दोनों साथ चाहते थे... और मेरी शादी एक ऐसे व्यक्ति से हो गई थी जो मुझे सिर्फ नाम का पति दे सकता था।
विक्रम बहुत अच्छे इंसान हैं — मुझे समझते हैं, आदर करते हैं। लेकिन शारीरिक संबंध के अभाव ने हमारे बीच एक दीवार खड़ी कर दी है। औरत के लिए सिर्फ प्रेम नहीं, स्पर्श का अपनापन भी जरूरी होता है।
कभी-कभी सोचती हूं — अगर किसी अपने हमउम्र, कम कमाने वाले लड़के से शादी होती तो शायद मैं ज्यादा खुश होती। शायद हम जिंदगी को साथ जीते, न कि सिर्फ निभाते।
आज मैं हर माता-पिता से कहना चाहती हूं —
"सरकारी नौकरी वाले दूल्हे के पीछे मत भागिए, अपनी बेटी की उम्र, उसकी खुशी और उसकी मानसिक-शारीरिक ज़रूरतों को भी समझिए।"
🌺 "रिश्ते सिर्फ सरकारी ठप्पों से नहीं चलते... उसमें भावनाओं का ताप, उम्र की समझ और दिल से जुड़ाव भी ज़रूरी होता है। वरना सारी सुविधाएं भी एक स्त्री को अधूरा छोड़ देती हैं।" 💔
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