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#सत_भक्ति_संदेश कबीर, आग पराई आपनी, हाथ दियें जल जाये। नारी पराई आपनी, परसें बिन्द नसाया।। जैसे अग्नि अपने घर की हो, चाहे दूसरे घर की, हाथ देने से हाथ जलेगा। इसी प्रकार स्त्री अपनी हो या अन्य की, मिलन करने से एक जैसी ही हानि होती है। ##सत_भक्ति_संदेश
#सत_भक्ति_संदेश - Hl कबीर, आग पराई आपनी , নিষ্ট ভল আশ] हाथ नारी पराई आपनी , परसें बिन्द नसाया। | भावार्थ- जैसे अग्नि अपने घार ி 87, =18 घार की, हाथ दूसरे देने से हाथ जलेगा| इसी प्रकार स्त्री अपनी हाे या अन्य की, मिलन करने से एक जैसी ही होती है। परंतु भक्ति मार्ग पर हानि लगने से सुधार हा जाता है। दोनों ही पार हो जाते हैं। Sazd CCwpat OZ Ctalutuj Follow US on Satlok Ashram से जुड़ने कै लिए संपर्क करें ;- +९१ ८२२२ ८८० ५४१ संत राममाल जी महाराज  Hl कबीर, आग पराई आपनी , নিষ্ট ভল আশ] हाथ नारी पराई आपनी , परसें बिन्द नसाया। | भावार्थ- जैसे अग्नि अपने घार ி 87, =18 घार की, हाथ दूसरे देने से हाथ जलेगा| इसी प्रकार स्त्री अपनी हाे या अन्य की, मिलन करने से एक जैसी ही होती है। परंतु भक्ति मार्ग पर हानि लगने से सुधार हा जाता है। दोनों ही पार हो जाते हैं। Sazd CCwpat OZ Ctalutuj Follow US on Satlok Ashram से जुड़ने कै लिए संपर्क करें ;- +९१ ८२२२ ८८० ५४१ संत राममाल जी महाराज - ShareChat