|| खाकी का सपूत भारत का प्रहरी||
एक प्रहरी बूटों पर जब कर्कश काज को टापे
तोड़ देता है नीद जवानी आंखों से जब चापे
सन्तुष्ट ज़माना कहता है ये खाकी खेत जवानों का
मुस्तैद खड़ा है कर्मों पे ये दुश्मन को झुंझलाता
सुरभित है सुवास कहानी आंख में भरता पानी
शीतल समीर का हल्का झोका देता है मधुबानी
सारे भाव वियोग भुलाता कर्मो के छातिपे चढ़ता
आकुल मनको शान्ति देकर मन में अपना देश सजता
भारत माँ का लाल प्रहरी पत्थर से टकराता है
शीशे जैसा चूर करे वो दुश्मन को धूल चटाता है
भारत माँ की बगिया का ये शासन का रखवाला
सारा जमाना मांग रहा है देखकर ताना बाना
भीनी भीनी खुशबू से ये खाकी में खिल जाता है
जल जाता है दुश्मन देखकर जब मोछ पे ताव देखता
बिजली भी डर जाती है बादल भी घबराता है
भारत के वीर सपूत को देखकर दुश्मन भी डर जाता है
H Prasad #मां


