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#sad #बेहतरीन उर्दू शायरी✍️
sad - बोजिसे मैने दिल काख़ुदा बनाया  उसके दिल में मेरी कोई दुआ न पाया।  मैं उसकी महफ़िल काचिराग भीनःथी वो जहाँ गया, बहाँ मेरी सदा नःपाया तरजीहों में मेरा ज़िक्र तक न आया मैं ख़्वाब थी॰ मगर हक़ीक़त में बफ़ना न पाया। क़िसमत, अजब है ये फ़ासला  अजब है मैं उसके क़रीब थी, मगर जगह न पाया। बोजिसे मैने दिल काख़ुदा बनाया  उसके दिल में मेरी कोई दुआ न पाया।  मैं उसकी महफ़िल काचिराग भीनःथी वो जहाँ गया, बहाँ मेरी सदा नःपाया तरजीहों में मेरा ज़िक्र तक न आया मैं ख़्वाब थी॰ मगर हक़ीक़त में बफ़ना न पाया। क़िसमत, अजब है ये फ़ासला  अजब है मैं उसके क़रीब थी, मगर जगह न पाया। - ShareChat