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#आनंद शर्मा
आनंद शर्मा - क्या सच में नशे में खुशी है? नशे की लत जिन्हें है, उनसे एक बार ईमानदारी से पूछिए क्या वो वास्तव में खुश हैं? क्या वो चैन की नींद सो पाते हैं? क्या उनके घर परिवार में सुख शांति है? नशा ठीक वैसा ही है जैसे किसी ऐसे व्यक्ति का नदी या तालाब के गहरे पानी में उतर जाना, जिसे तैरना नहीं आता। शुरुआत में ठंडक लगती है 3616 आता है, लेकिन गहराई में जाने के बाद जब पैर नहीं टिकते तब घुटन डर और का डूबने अहसास होता है। ठीक यही स्थिति नशे की होती है जो धीरे धीरे व्यक्ति की सोच शरीर संबंध और समाज को निगल जाती है। बल्कि यह एक धीमा नशा कोई स्टाइल नहीं॰ कोई समाधान नहीं ज़हर है। शुरुआत में साथी हौसला बढ़ाते हैं॰ लेकिन जब बर्बादी आती है॰ तो कोई साथ नहीं होता। घर बिखरते हैं॰ रिश्ते हैं గడగ और सबसे दुखद आत्मसम्मान मर जाता है। आज जब हम मां भगवती का स्मरण करते हैं॰ शक्ति, संयम और क्यों न संकल्प लें कि नशे से दूरी सद्बुद्धि की आराधना करते हैं बनाकर खुद को और अपने परिवार को बचाएं। क्योंकि असली नशे में नहीं सचेत जीवन में है। खुशी नहीं तो कभी नहीं| नशा छोड़ें जीवन से जुड़ें। आज आनंद शर्मा क्या सच में नशे में खुशी है? नशे की लत जिन्हें है, उनसे एक बार ईमानदारी से पूछिए क्या वो वास्तव में खुश हैं? क्या वो चैन की नींद सो पाते हैं? क्या उनके घर परिवार में सुख शांति है? नशा ठीक वैसा ही है जैसे किसी ऐसे व्यक्ति का नदी या तालाब के गहरे पानी में उतर जाना, जिसे तैरना नहीं आता। शुरुआत में ठंडक लगती है 3616 आता है, लेकिन गहराई में जाने के बाद जब पैर नहीं टिकते तब घुटन डर और का डूबने अहसास होता है। ठीक यही स्थिति नशे की होती है जो धीरे धीरे व्यक्ति की सोच शरीर संबंध और समाज को निगल जाती है। बल्कि यह एक धीमा नशा कोई स्टाइल नहीं॰ कोई समाधान नहीं ज़हर है। शुरुआत में साथी हौसला बढ़ाते हैं॰ लेकिन जब बर्बादी आती है॰ तो कोई साथ नहीं होता। घर बिखरते हैं॰ रिश्ते हैं గడగ और सबसे दुखद आत्मसम्मान मर जाता है। आज जब हम मां भगवती का स्मरण करते हैं॰ शक्ति, संयम और क्यों न संकल्प लें कि नशे से दूरी सद्बुद्धि की आराधना करते हैं बनाकर खुद को और अपने परिवार को बचाएं। क्योंकि असली नशे में नहीं सचेत जीवन में है। खुशी नहीं तो कभी नहीं| नशा छोड़ें जीवन से जुड़ें। आज आनंद शर्मा - ShareChat