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जब पाकिस्तानी अफसर ने कहा – ‘माधुरी दीक्षित हमें दे दो’ 7 जुलाई 1999, शाम का समय, जगह-द्रास सब सेक्टर अचानक वायरलेस पर पाकिस्तानी अफसर की आवाज आती है, लहजा एकदम पंजाबी...'औए शेरशाह नाम रखने से कोई शेरशाह नही हो जाता....ऊपर आने की हिम्मत मत मरना, वरना मुश्किल में पड़ जाओगे।' ये आवाज़ सुनते ही आस पास खड़े सैनिकों और अफसरों का खून खौल जाता है......लेकिन उनका कमांडिंग अफसर एकदम शांत होता है, हल्की मुस्कुराहट के साथ सबको देखता है। ये एक phsychological game था, जो पाकिस्तानी अफसर खेल रहा था.....चुप्पी को जीत समझ कर वो आगे बोला 'शेरशाह, एक काम करो.....माधुरी दीक्षित हमे दे दो....हम चले वापस चले जाएंगे'.....उसके बाद एक जोरदार पाशविक हंसी वायरलेस पर गूंज गयी। भारतीय सैनिकों में गुस्से की लहर दौड़ गयी.....लेकिन कमांडिंग अफसर अभी भी शांत था....पता नही क्या सोच रहा था... फिर एकदम से Captain विक्रम बत्रा ने वायरलेस पर कहा......'चल देखते हैं, अगले एक घंटे में 4875 top पर कौन रहता है'.....और ये कह कर वायरलेस disconnect कर दिया। 1987.....हिमाचल का खूबसूरत शहर पालमपुर.....स्कूल प्रिंसिपल गिरधारी लाल बत्रा के 2 जुड़वा बेटे थे, विक्रम और विशाल....विक्रम बड़ा था क्योंकि 14 मिनट पहले दुनिया में आया था...दोनों बच्चो को परमवीर चक्र प्रोग्राम बहुत अच्छा लगता था....पड़ोसी के घर टीवी पर यही प्रोग्राम देखने जाया करते थे। विक्रम कुछ अलग थे.....शुरू से ही sports में जबरदस्त रहे....कराटे की ग्रीन बेल्ट हासिल की, टेबल टेनिस में नेशनल खेला, फिर NCC में उत्तर भारत के best Cadet भी बने। सेना में जाने का जुनून था, 1995 में ग्रेजुएशन करने के बाद CDS दिया....उसी समय उनका चयन हांगकांग की एक reputed Marine Firm में भी हो गया था...merchant navy की नौकरी थी, हजारो रुपये की तनख्वाह और अन्य फायदे.....हाथ मे नौकरी भी थी और CDS का लेटर भी....विक्रम से सेना को चुना। 1996 में सेना में चयन हुआ, IMA से pass out हुए और 13 JAK RIF में लेफ्टिनेंट बने। 1998 - विक्रम को महू भेजा गया, यंग अफसर ट्रेनिंग कोर्स के लिए, जहां उन्होंने Alpha grade प्राप्त की। उसके बाद सीधे भेजा गया सोपोर, जहां उन्होंने कई anti terrorist operations में भाग लिया, और कई आतंकियों को उनके अंजाम तक पहुचाया। एक बार रात को QRT लेकर आपरेशन करने गए....आतंकवादी एक जंगल मे छुपे हुए थे....एक दम से सामने से फायर आया, गोली विक्रम के कंधे को छूती हुई पीछे खड़े सैनिक को लगी, और उसकी मृत्यु हो गयी। अपने सैनिक को खोने की वजह से विक्रम बड़े क्षुब्ध थे, रातभर आपरेशन चलाया और सुबह तक सारे आतंकी मार दिए, और अपने किसी और सैनिक को खरोच तक नही आई। बाद में एक वाक्या उन्होंने अपनी एक बहन को बताया, उन्होंने कहा था कि 'वो गोली मेरे लिए थी, उसकी वजह से मेरा एक साथी चला गया'......उन्हें इसका मलाल ताउम्र रहा। 1999 - विक्रम बेलगाम में थे, कमांडो कोर्स कर रहे थे.....और जैसी की उनकी आदत थी, best से कम कुछ मंजूर नही.....यहां भी Instructor Grade हासिल किया। training खत्म कर के पालमपुर के लिए निकले थे....इस बार की होली घर पर जो मनानी थी। घर पर छुट्टी मनाई जा रही थी, एक शाम विक्रम के सभी दोस्तों ने अपने जाने पहचाने Neugal Cafe पर शाम को मिलना तय किया.....पार्टी चल रही थी....मौज मस्ती, हंसी मजाक, एक दूसरे की टांग खींचना चल रहा था.....24-25 साल के युवा और करते ही क्या हैं???? तभी उनके एक दोस्त ने बताया कि कश्मीर में कुछ गड़बड़ चल रही है, शायद लड़ाई हो सकती है भारत पाकिस्तान के बीच......टीवी पर भी पाकिस्तानी घुसपैठ की खबरें आने लगी थी....दोस्तो ने कहा 'Vikram Be Careful'..... जिसके जवाब में उन्होंने कहा 'I'll either come back after raising the Indian flag in victory or return wrapped in it. But I'll come back for sure.' आर्डर आ गया था, 1 जून 1999 को रिपोर्ट करना था, क्योंकि कारगिल जाने के आर्डर मिल गए थे...उनकी बटालियन की कमान संभाल रहे थे मेजर YK Joshi, जो बाद में लेफ्टिनेंट कर्नल बने.....और आज लेफ्टिनेंट जनरल हैं। बटालियन को नए आर्डर मिले, द्रास जाने के लिए....द्रास दुनिया मे दूसरा सबसे ठंडा इंसानों के रहने का स्थान है। 19 जून 1999, विक्रम की बटालियन को Peak 5140 capture करने का आर्डर मिला....जो उन्होंने उसी दिन कर भी लिया.....विक्रम का code name रखा गया था शेरशाह.....और victory sign था 'ये दिल मांगे मोर'.....जो पेप्सी का प्रचलित स्लोगन था उन दिनों....लेकिन captain विक्रम बत्रा के लिए तो ये एक स्लोगन था उनकी जीत की भूख को व्यक्त करने के लिए.....उन्हें सर्वोच्च से कम कुछ पसंद ही नही था। 5140 capture करने के बाद उन्हें सैन्यध्यक्ष जनरल VP Malik ने स्वयं फोन कर बधाई दी, उन्हें प्रमोशन दे कर Captain बनाया गया.....और साथ ही उनका नाम महावीर चक्र के लिए भी भेजा गया था........लेकिन ये दिल तो मांगे more..... 29 जून को आर्डर मिला peak 4875 caputre करने का.....उसी दिन मार्च करने से पहले उन्होंने घर फोन किया....माँ बाप को कहा 'मैं एकदम fit और fine हूँ, फिक्र ना करना'.......ये उनकी आखिरी बात थी अपने घर वालो से। 7 जुलाई 1999......सामने peak 4875.....17000 फीट की खड़ी चोटी, 80 डिग्री की चढ़ाई.....जगह जगह बर्फ और धुंध इसे और भी डरावना बना रही थी.....दुनिया के इतिहास में इतनी ऊंचाई पर ऐसा आपरेशन सिर्फ सियाचिन में ही हुआ था, Operation राजीव.....जब परमवीर चक्र विजेता captain बाना सिंह ने 23000 फीट पर बाना top पर अपनी टीम के साथ कब्जा किया था......उसके अलावा इतनी ऊंचाई और ऐसे मौसम में कभी लड़ाई नही लड़ी गयी थी। पाकिस्तानी फौजी 16000 फीट की ऊंचाई पर बंकर बना कर बैठे थे, वहाँ से तो पत्थर भी फेंको तो गोली से खतरनाक होता है....पाकिस्तानियों ने वायरलेस intercept कर लिया था, उन्हें पता था कि शेरशाह आ रहा है.....एक 24 साल का बहादुर लड़का, जो शायद हारना नही जानता था....पाकिस्तानियों को भी पता था कि ये अफसर बहुत बहादुर है....इसलिए उसका मनोबल तोड़ने को पाकिस्तानी अफसर ने कॉल किया था......लेकिन व्यर्थ था। Captain विक्रम बत्रा के पास अब सिर्फ एक घंटा था पाकिस्तानी अफसर को उसकी हैसियत दिखाने का। वो अपनी टीम के साथ निकल पड़े...ऊपर से मोर्टार, मशीन गन, granade के हमले झेलते हुए, रस्सियों से लटक कर, भारी भरकम बंदूकें और असलाह लिए भारतीय सेना ऊपर पहुँच ही गयी.......उसके बाद जो हुआ वो अप्रत्याशित था पाकिस्तानियों के लिए......5 बंकर खुद उड़ाए, ना जाने कितने पाकिस्तानियों को शूट किया......आखिरी बंकर को उड़ाते हुए उन्होंने कहा भी था 'from Madhuri with love' मिशन लगभग पूरा हो चुका था.....तभी एक अफसर लेफ्टिनेंट नवीन के पैर के पास granade फटा और वो घायल हो गये.....बंकर में Captain बत्रा और एक सूबेदार रघुनाथ थे....सूबेदार ने JCO को बंकर के अंदर लाने के लिए जैसे ही जाना चाहा... Captain ने उनका हाथ पकड़ कर कहा....'तू बाल बच्चेदार है, हट जा पीछे'... और captain बंकर से बाहर निकल गए, वो जैसे तैसे लेफ्टिनेंट नवीन को वापस ले आये और उन्हें बंकर में धकेल दिया, लेकिन अब वो दुश्मन के एकदम सामने थे.....अब कोई रास्ता नही था, Captain विक्रम बत्रा ने hand to hand combat में 5 पाकिस्तानियों को मारा, लेकिन तभी एक sniper का शॉट उन्हें लगा, उसके बाद तो दुश्मन के जैसे सैंकड़ो फायर खुल गए उन पर.....और शेरशाह शांत हो गया हमेशा के लिए। उन्हें मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया.... IMA देहरादून, हर शाम 8 बजे, Captain विक्रम बत्रा मेस में शांति छा जाती है, दिन भर के थके हुए कैडेट्स अपनी सीट पर बैठे होते हैं, उनके सामने उनकी प्लेट्स रखी होती हैं.....लेकिन कोई हरकत नही होती.....मेस के बीचोबीच में Captain विक्रम बत्रा (PVC) की सीट है, पहले उन्हें खाना परोसा जाता है, उसके बाद ही कैडेट्स खाने को हाथ लगाते हैं..... Captain विक्रम बत्रा (PVC) द्रास में थे, हर बुधवार शाम 7 बजे वो चंडीगढ़ फोन करते थे, उनकी प्रेमिका डिंपल को.....करगिल की लड़ाई के बाद शादी करने की तैयारी थी.....लेकिन वो हो नही पाया....डिंपल ने भी शादी करने से मना कर दिया, आज भी अविवाहित हैं। हम जब 24 साल के थे, हम क्या सोचते थे.....कि अगले महीने सैलरी से Nike के जूते लेंगे, या levis की जीन्स, या शायद घूमने जाएंगे लद्दाख या मनाली....या फिर कोई मूवी देखेंगे, पिज़्ज़ा खाएंगे.... वहीं वो 24 साल का लड़का, अपनी टीम को lead कर रहा था, 17000 फीट की चढ़ाई चढ़ रहा था, जहां ऊपर से मशीन गन चल रही थी और granade फैंके जा रहे थे....अगल बगल में लोग मर रहे थे, किसी की आंख में गोली, किसी का भेजा बाहर.....लेकिन उसको जिद थी....5140 और 4875 वापस लेना है, टाइगर हिल वापस लेना है....उसके लिए चाहे कितनी ही जाने क्यों ना लेनी पड़ें, या खुद की जान ही क्यों ना देनी पड़े...... तभी तो वो 'परमवीर' है। #🇮🇳मेरा भारत, मेरी शान #👌 छत्तीसगढ़िया सबसे बढ़िया #🇮🇳 कारगिल शहीदों के कोट्स #🇮🇳 देशभक्ति #🪖कारगिल विजय के स्पेशल Status 🫡
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