ShareChat
click to see wallet page
search
#✒ गुलज़ार की शायरी 🖤 #💌शब्द से शायरी✒️ #✍️ अनसुनी शायरी #✍️ साहित्य एवं शायरी
✒ गुलज़ार की शायरी 🖤 - ೭೧' फितरत तो कुछ यूं भी है इन्सान की बारिश ख़त्म हो जाए तो छतरी भी बोझ लगती है ೭೧' फितरत तो कुछ यूं भी है इन्सान की बारिश ख़त्म हो जाए तो छतरी भी बोझ लगती है - ShareChat