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#जय माँ गायत्री जय गुरुवर
जय माँ गायत्री जय गुरुवर - हरि शरणं "लिंग थापि बिधिवत करि पूजा , सिव समान प्रिय मोहि न दूजा , सिव द्रोही मम दास कहावा, सो नर मोहि सपनेहुँ नहिं पावा भगवान राम कहते हैं- मैंने विधि-विधान से इस शिवलिंग की पूजा की है। संसार में शिव के मुझे दूसरा कोई থণনা ব২ সমান प्रिय नहीं है। जो व्यक्ति शिव का द्रोह अपमान या विरोध) करता है और फिर भी मेरा भक्त |दास) कहलाता है, वह मनुष्य मुझे स्वप्न में भी प्राप्त नहीं कर सकता। हरि शरणं "लिंग थापि बिधिवत करि पूजा , सिव समान प्रिय मोहि न दूजा , सिव द्रोही मम दास कहावा, सो नर मोहि सपनेहुँ नहिं पावा भगवान राम कहते हैं- मैंने विधि-विधान से इस शिवलिंग की पूजा की है। संसार में शिव के मुझे दूसरा कोई থণনা ব২ সমান प्रिय नहीं है। जो व्यक्ति शिव का द्रोह अपमान या विरोध) करता है और फिर भी मेरा भक्त |दास) कहलाता है, वह मनुष्य मुझे स्वप्न में भी प्राप्त नहीं कर सकता। - ShareChat