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#जय माँ गायत्री जय गुरुवर
जय माँ गायत्री जय गुरुवर - हरि शरणं गोधन , गजन्धन, बाजि-्धन, और रतन धनन्खान जब आवे संतोष-्धन , सब धन धूरि समान संसार में गो-रूपी धन, हाथी रूपी धन, घोड़े-रूपी धन तो हैं ही, मौजूद और भी तरह-्तरह के रतनों, धनों की खानें हैं। लेकिन उनसे आदमी का मन कभी भी नहीं भर सकता। हाँ, आदमी के पास তন सन्तोषररूपी धन आ जाता है, तब बाकी सभी प्रकार के धन धूल या मिट्टी के समान हो जाया करते हैं। शब्दों में कहा जा सकता है दूसरे कि सन्तोषररूपी धन पाकर ही आदमी का मन भरा करता है। हरि शरणं गोधन , गजन्धन, बाजि-्धन, और रतन धनन्खान जब आवे संतोष-्धन , सब धन धूरि समान संसार में गो-रूपी धन, हाथी रूपी धन, घोड़े-रूपी धन तो हैं ही, मौजूद और भी तरह-्तरह के रतनों, धनों की खानें हैं। लेकिन उनसे आदमी का मन कभी भी नहीं भर सकता। हाँ, आदमी के पास তন सन्तोषररूपी धन आ जाता है, तब बाकी सभी प्रकार के धन धूल या मिट्टी के समान हो जाया करते हैं। शब्दों में कहा जा सकता है दूसरे कि सन्तोषररूपी धन पाकर ही आदमी का मन भरा करता है। - ShareChat