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#✒️ કવિની કલમ
✒️ કવિની કલમ - हिम्मत की राह मैं तो अपना दर्द किसी यारों को नहीं बता सकता, शेरावाली , मैं अकेला लड़ रहा हूँ अपनी परेशानियों से, महाकाली। रास्ते काँटों भरे हों तो डरना नहीं ऐ दोस्त, जिन्होंने हिम्मत को साथी बनाया , वही आगे बढ़े , महाकाली| अंधेरी रातों में भी उम्मीद का दीप जलाए रखना, सूरज भी कभी बादलों के पीछे छिप गया, शेरावाली। अकेले चलते चलते अगर कदम कभी थक जाएँ, मंज़िल ने उन्हीं को गले लगाया, जो कभी ना रुके, महाकाली। ज़िंदगी की जंग में ज़ख्म तो सबको मिलते हैं, जो मुस्कुरा कर जी गए, वही असली विजेता बने, शेरावाली। लिखितम् : प्रकाश पंडित हिम्मत की राह मैं तो अपना दर्द किसी यारों को नहीं बता सकता, शेरावाली , मैं अकेला लड़ रहा हूँ अपनी परेशानियों से, महाकाली। रास्ते काँटों भरे हों तो डरना नहीं ऐ दोस्त, जिन्होंने हिम्मत को साथी बनाया , वही आगे बढ़े , महाकाली| अंधेरी रातों में भी उम्मीद का दीप जलाए रखना, सूरज भी कभी बादलों के पीछे छिप गया, शेरावाली। अकेले चलते चलते अगर कदम कभी थक जाएँ, मंज़िल ने उन्हीं को गले लगाया, जो कभी ना रुके, महाकाली। ज़िंदगी की जंग में ज़ख्म तो सबको मिलते हैं, जो मुस्कुरा कर जी गए, वही असली विजेता बने, शेरावाली। लिखितम् : प्रकाश पंडित - ShareChat