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#📿جمعہ کے دن درود🕌 #🕋 مکہ و مدینہ 🕌 #🕌جمعہ مبارک😍 #🕌بیت المقدس☪️
📿جمعہ کے دن درود🕌 - हाजी साहब ' कहलवॉने की भूख आजकल हज से लौटने के बाद 'हाजी साहब ' कहलवाने की ऐसी भूख जागी है कि अगर कोई नाम के आगे यह 'लेबल' न लगाए, तो लोग बुरा मान जाते हैं। किसी ने खुद को 'नमाज़ी याद रखिए, नमाज़ भी फ़र्ज़ है, लेकिन क्या कभी साहब' कहलवाया? ज़कात भी फ़र्ज़ है, क्या कोई ज़काती साहब' बनता है? फिर सिर्फ़ हज के साथ ही यह 'दिखावा' क्यों ? 67 कुरआन पाक दिखावे की बर्बादीः अल्लाह तआला कुरआन में हज का मक़सद अपनी ' अना' को फ़रमाता हैः "तबाही है उन नमाज़ियों के लिए... जो अरफ़ात के मैदान में दफ़न करके दिखावा करते हैं। " (सूरह अल॰माऊन , १0७:४ ६) आना था, उसे पाल पोसकर साथ लाना नहीं। हदीस शरीफ़ सहाबा ए॰किराम और बुजुर्गो ने कई- कई हज किए, लेकिन कभी अपने नाम नाम और शोहरत का अंजामः सहीह मुस्लिम की तवील हदीस (हदीस नंबर १९०५) के के आगे ' हाजी' नहीं लगाया। 0 क़यामत के दिन सबसे पहले उन लोगों সুনানিক, अगर आप चाहते हैं कि आपका हज को जहन्नुम में डाला जाएगा  क़बूल होने वाला हज बने, तो अपनी जिन्होंने इल्म , जिहाद और सखावत सिर्फ़ इसलिए की ताकि लोग उन्हें आलिम , बहादुर' या 'सखी पहचान अल्लाह की नज़रों में बनाएं, कहें। अगर आपका हज भी सिर्फ़ हाजी মাচন' इंसानों की ज़ुबान पर नहीं। कहलवाने के लिए है, तो अंजाम सोच लीजिए।  सच्चा इस्लाम हाजी साहब ' कहलवॉने की भूख आजकल हज से लौटने के बाद 'हाजी साहब ' कहलवाने की ऐसी भूख जागी है कि अगर कोई नाम के आगे यह 'लेबल' न लगाए, तो लोग बुरा मान जाते हैं। किसी ने खुद को 'नमाज़ी याद रखिए, नमाज़ भी फ़र्ज़ है, लेकिन क्या कभी साहब' कहलवाया? ज़कात भी फ़र्ज़ है, क्या कोई ज़काती साहब' बनता है? फिर सिर्फ़ हज के साथ ही यह 'दिखावा' क्यों ? 67 कुरआन पाक दिखावे की बर्बादीः अल्लाह तआला कुरआन में हज का मक़सद अपनी ' अना' को फ़रमाता हैः "तबाही है उन नमाज़ियों के लिए... जो अरफ़ात के मैदान में दफ़न करके दिखावा करते हैं। " (सूरह अल॰माऊन , १0७:४ ६) आना था, उसे पाल पोसकर साथ लाना नहीं। हदीस शरीफ़ सहाबा ए॰किराम और बुजुर्गो ने कई- कई हज किए, लेकिन कभी अपने नाम नाम और शोहरत का अंजामः सहीह मुस्लिम की तवील हदीस (हदीस नंबर १९०५) के के आगे ' हाजी' नहीं लगाया। 0 क़यामत के दिन सबसे पहले उन लोगों সুনানিক, अगर आप चाहते हैं कि आपका हज को जहन्नुम में डाला जाएगा  क़बूल होने वाला हज बने, तो अपनी जिन्होंने इल्म , जिहाद और सखावत सिर्फ़ इसलिए की ताकि लोग उन्हें आलिम , बहादुर' या 'सखी पहचान अल्लाह की नज़रों में बनाएं, कहें। अगर आपका हज भी सिर्फ़ हाजी মাচন' इंसानों की ज़ुबान पर नहीं। कहलवाने के लिए है, तो अंजाम सोच लीजिए।  सच्चा इस्लाम - ShareChat