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#🙏 ದೈನಂದಿನ ಭಕ್ತಿ ಸ್ಟೇಟಸ್ #🙏ನಮಸ್ಕಾರ #🖊ಬದುಕಿನ ಕೋಟ್ಸ್📜 #🌅Good Morning🍵 #🔱 ಭಕ್ತಿ ಲೋಕ
🙏 ದೈನಂದಿನ ಭಕ್ತಿ ಸ್ಟೇಟಸ್ - Shiv Babas Murli Points 10/5/2026 "चारों ही सब्जेक्ट में स्वमान के अनुभवी स्वरूप बन अनुभव की अथॉरिटी को कार्य में लगाओ" २. आज ब्राह्मण संसार के रचयिता बापदादा अपने चारों ओर के ब्राह्मण संसार को देख रहे हैं। हर एक ब्राह्मण सारे संसार में विशेष आत्मा है। कोटों में कोई है क्योंकि तन में आये हुए बाप को पहचान लिया।  साधारण से चमकती हुई लाइट खुद को भी 2 सदा मस्तक अनुभव हो, खुद भी उस स्वरूप में स्थित हो, स्मृति स्वरूप हो, स्मृति करने वाला नहीं , स्मृति स्वरूप हो और स्मृति स्वरूप है या नहीं , उसका प्रमाण यह है कि जहाँ स्मृति के अनुभवी स्वरूप हैं वहाँ अपने में समर्थी हर कार्य करते हुए भी अनुभव होगी। ३. ब्रह्मा बाप ने क्या नहीं देखा , क्या नहीं किया, जिम्मेवार होते फिर भी अन्त में शुभ भावना , शुभ कामना के तीन शब्द सभी को शिक्षा देके गये। याद है ना! तीन शब्द याद हैं ना। स्वयं भी निराकारी, निरहंकारी , निर्विकारी इसी स्थिति में अव्यक्त बनें , किसी को भी कर्मभोग की फीलिंग नहीं दिलाई।  पुरुषार्थ के मार्ग को सहज ४. नॉलेज की लाइट द्वारा और स्पष्ट करने वाले फरिश्ता स्वरूप भव। ५. व्यर्थ बोलना अर्थात् अनेकों को डिस्टर्ब करना | Shiv Babas Murli Points 10/5/2026 "चारों ही सब्जेक्ट में स्वमान के अनुभवी स्वरूप बन अनुभव की अथॉरिटी को कार्य में लगाओ" २. आज ब्राह्मण संसार के रचयिता बापदादा अपने चारों ओर के ब्राह्मण संसार को देख रहे हैं। हर एक ब्राह्मण सारे संसार में विशेष आत्मा है। कोटों में कोई है क्योंकि तन में आये हुए बाप को पहचान लिया।  साधारण से चमकती हुई लाइट खुद को भी 2 सदा मस्तक अनुभव हो, खुद भी उस स्वरूप में स्थित हो, स्मृति स्वरूप हो, स्मृति करने वाला नहीं , स्मृति स्वरूप हो और स्मृति स्वरूप है या नहीं , उसका प्रमाण यह है कि जहाँ स्मृति के अनुभवी स्वरूप हैं वहाँ अपने में समर्थी हर कार्य करते हुए भी अनुभव होगी। ३. ब्रह्मा बाप ने क्या नहीं देखा , क्या नहीं किया, जिम्मेवार होते फिर भी अन्त में शुभ भावना , शुभ कामना के तीन शब्द सभी को शिक्षा देके गये। याद है ना! तीन शब्द याद हैं ना। स्वयं भी निराकारी, निरहंकारी , निर्विकारी इसी स्थिति में अव्यक्त बनें , किसी को भी कर्मभोग की फीलिंग नहीं दिलाई।  पुरुषार्थ के मार्ग को सहज ४. नॉलेज की लाइट द्वारा और स्पष्ट करने वाले फरिश्ता स्वरूप भव। ५. व्यर्थ बोलना अर्थात् अनेकों को डिस्टर्ब करना | - ShareChat