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#✒️ કવિની કલમ
✒️ કવિની કલમ - प्यार किया तो डरना क्या प्यार किया तो डरना क्या, जब तू नहीं तो जीना क्या। तेरी यादों में रात ढलती, इन आँखों का फिर सपना क्या। धड़कन में है, নু কী মহী  दिल में कोई और बसा क्या। तेरे बिना ये सूना जीवन, फूल खिले तो महका क्या। चाँद भी फीका लगता है अब, तेरे बिन ये उजियारा क्या। अब सुन ऐ दिल, प्रकाश कहे प्यार बिना फिर जीना क्या। प्यार किया तो डरना क्या प्यार किया तो डरना क्या, जब तू नहीं तो जीना क्या। तेरी यादों में रात ढलती, इन आँखों का फिर सपना क्या। धड़कन में है, নু কী মহী  दिल में कोई और बसा क्या। तेरे बिना ये सूना जीवन, फूल खिले तो महका क्या। चाँद भी फीका लगता है अब, तेरे बिन ये उजियारा क्या। अब सुन ऐ दिल, प्रकाश कहे प्यार बिना फिर जीना क्या। - ShareChat