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#✒️ કવિની કલમ
✒️ કવિની કલમ - यार, यारी कर बैठे, दिल बेइख़्तियार कर बैठे। কমন নী বদ্ধা নিল্াৎ থী, वो हमसे इनकार कर बैठे। एक उम्मीद थी जीने की बस, वो भी वो वार कर बैठे। चुप रहे तो समझा नहीं कुछ, हम दिल का इज़हार कर बैठे। जिसे अपना समझा था हमने , वो गैरों से प्यार कर बैठे। प्रकाश पंडित यार, यारी कर बैठे, दिल बेइख़्तियार कर बैठे। কমন নী বদ্ধা নিল্াৎ থী, वो हमसे इनकार कर बैठे। एक उम्मीद थी जीने की बस, वो भी वो वार कर बैठे। चुप रहे तो समझा नहीं कुछ, हम दिल का इज़हार कर बैठे। जिसे अपना समझा था हमने , वो गैरों से प्यार कर बैठे। प्रकाश पंडित - ShareChat