JANVI
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बाग में टहलते उनकी नजरों से
जब मेरी नजर टकराई,
मेरी खिड़की वक़्त की गवाही
बनकर इतराई,
जब उन्होंने मुझमें देख ली
अपनी खुदाई,
वो बेनकाब हो गए,
बाग में जितने पेड़ थे बबूल के,
सब गुलाब हो गए l #मेरी डायरी #📓 हिंदी साहित्य
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