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#☝अनमोल ज्ञान
☝अनमोल ज्ञान - 42ABEL कहानीया हानिया जितना प्रभु ने दिया है, उसमें खुश रहना सीखो लालच का कोई अंत नहीं है। और संतोष से बड़ा कोई धन नहीं, प्रभु की दी हुई सूखी रोटी में जो आनंद है, वह लालच से कमाए गए छप्पन भोग में भी नहीं मिल सकता, लालच दलदल की तरह है, जितना पाओगे ही और पाने की चाह में धंसते चले ওননা ئ7311, ईश्वर ने भाग्य में जो लिखा है, वह भागकर भी आएगा; और जो भाग्य में नहीं है॰ उसे लालच से लाओगे तो टिक नहीं पाएगा | 42ABEL कहानीया हानिया जितना प्रभु ने दिया है, उसमें खुश रहना सीखो लालच का कोई अंत नहीं है। और संतोष से बड़ा कोई धन नहीं, प्रभु की दी हुई सूखी रोटी में जो आनंद है, वह लालच से कमाए गए छप्पन भोग में भी नहीं मिल सकता, लालच दलदल की तरह है, जितना पाओगे ही और पाने की चाह में धंसते चले ওননা ئ7311, ईश्वर ने भाग्य में जो लिखा है, वह भागकर भी आएगा; और जो भाग्य में नहीं है॰ उसे लालच से लाओगे तो टिक नहीं पाएगा | - ShareChat