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कानून की अदालत हो या जिंदगी की... सही वक्त पर सही कदम न उठाया जाए, तो सिर्फ पछतावा हाथ लगता है। ​अदालतें सबूत मांगती हैं और रिश्ते कदर। लेकिन जब दोनों का वक्त निकल जाए, तो न अपील काम आती है, न दलील। ​आपकी इस पर क्या राय है? क्या वाकई हर चीज की एक 'एक्सपायरी डेट' होती है? मुझे नीचे कमेंट्स में ज़रूर बताएं। 👇💬 #legaladvice #कानून #deep thoughts #moj_content #🔥🔥Law of Student 💪🤳👊👊
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