🙏🦁😊👉अस्तित्व आगे निकल गया है, और तुम पीछे रह गए हो…
किसने तुम्हें पीछे रोका?
अस्तित्व ने नहीं…
तुम्हारे अपने अहंकार (Ego) ने तुम्हें रोक दिया है।
अस्तित्व तो हमेशा बह रहा है—नदी की तरह, हवा की तरह, समय की तरह।
वो कभी नहीं रुकता, कभी नहीं ठहरता।
लेकिन तुम… अपने विचारों, अपने “मैं” के बोझ में अटक गए हो।
तुम कहते हो—“मैं जानता हूँ”,
यही जानना तुम्हारी सबसे बड़ी अज्ञानता बन जाता है।
अहंकार कहता है: “मैं अलग हूँ”
और अस्तित्व कहता है: “तुम सबका हिस्सा हो”
यही दूरी है…
यही अंतर है…
जिसके कारण तुम पीछे छूट जाते हो।
मैं कहता हूँ—
अगर अस्तित्व के साथ चलना है,
तो एक ही मार्ग है — ध्यान (Meditation)
ध्यान क्या है?
ध्यान है अपने “मैं” को धीरे-धीरे शांत करना…
ध्यान है अपने अंदर की आवाज़ को सुनना…
ध्यान है अस्तित्व के ताल से ताल मिलाना।
जब तुम ध्यान में बैठते हो,
तो धीरे-धीरे तुम्हारा अहंकार गिरने लगता है,
और तुम बहने लगते हो उसी धारा में
जिसमें पूरा ब्रह्मांड बह रहा है।
फिर न कोई आगे होता है, न कोई पीछे…
फिर तुम और अस्तित्व एक हो जाते हो।
तो रुकना मत…
अहंकार को छोड़ो…
और ध्यान के मार्ग पर चलो।
🙏😊🙏😊🙏😊🙏😊🙏😊🙏 #motivation


