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##️⃣DilShayarana💘 #poetry #feeling #poems #moj_content
#️⃣DilShayarana💘 - क्यों सोचती हूँ मैं॰ हर वक़्त कुछ ना कुछ सोचती हूँ । कभी खुद को लेकर, तो कभी किसी अंजाने को लेकर। क्या मिलता है मुझे बेतुकी हरकतों से, 37 इन बेवजह बातों में से। यूँ खुद को उलझाने कभी बीते लम्हों में खो जाती हूँ, कभी आने वाले कल से डर जाती हूँ । दिल को सुकून चाहिए शायद, पर मैं उसे और बेचैन कर जाती हूँ लोग कहते हैं "इतना मत सोचा करो... पर ये दिल कहाँ मानता है, हर बात को महसूस कर जाता है। क्यों सोचती हूँ मैं॰ हर वक़्त कुछ ना कुछ सोचती हूँ । कभी खुद को लेकर, तो कभी किसी अंजाने को लेकर। क्या मिलता है मुझे बेतुकी हरकतों से, 37 इन बेवजह बातों में से। यूँ खुद को उलझाने कभी बीते लम्हों में खो जाती हूँ, कभी आने वाले कल से डर जाती हूँ । दिल को सुकून चाहिए शायद, पर मैं उसे और बेचैन कर जाती हूँ लोग कहते हैं "इतना मत सोचा करो... पर ये दिल कहाँ मानता है, हर बात को महसूस कर जाता है। - ShareChat