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#✍️ साहित्य एवं शायरी
✍️ साहित्य एवं शायरी - दिए दिल पे रखकर बोझ भारी चल दिए तोड़कर उम्मीद सारी चल देवता मंदिर में चुप बैठा रहा आरती करके चल दिए पुजारी कोई इनका हरने दुःख आया नहीं दान लेकर के भिखारी चल दिए की बात क्या थी दोस्त ही दुश्मनों  देखकर हालत हमारी चल दिए ज़िंदगी के इस मकां में जागकर दिए गुज़ारी रात तन्हा इक चल -Aman Musafir Dipo दिए दिल पे रखकर बोझ भारी चल दिए तोड़कर उम्मीद सारी चल देवता मंदिर में चुप बैठा रहा आरती करके चल दिए पुजारी कोई इनका हरने दुःख आया नहीं दान लेकर के भिखारी चल दिए की बात क्या थी दोस्त ही दुश्मनों  देखकर हालत हमारी चल दिए ज़िंदगी के इस मकां में जागकर दिए गुज़ारी रात तन्हा इक चल -Aman Musafir Dipo - ShareChat