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#☝आज का ज्ञान #☝ मेरे विचार #👉 लोगों के लिए सीख👈 #❤️जीवन की सीख #🤟 सुपर स्टेटस
☝आज का ज्ञान - यै ह्ौत्ी है लौकधार्मिकता ज्यादातर लोग हार्थों से पैर छुहते है देवी देवताओं भगवार्नों के,ओर मन से राक्षर्सों की पीठ चाटते है।मतलब अंधे स्वार्थो और कामनाओं की पूर्ति के लिए काम करते है,राक्षर्सों वाले। वाह री अंधी लोकधार्मिकता और सिखाते हैे॰ये सब आजकल के तथाकथित बाबा ओर पाखंडी गुरु।आज ही देखी एक बाबा की वीडियो जिसमे तथाकथित गुरु जी कह रहे थे,नल ओर कल का कोई भरोसा नर्हीं होता,जब तक टंकी ्में पानी है॰मुख लो और जब तक स्वास हैतब तक पाप धो लो।ज़िंदगी कब निकल जायेगी भरोसा नर्ही हे।ये बाबा पाखंड को छुपा गये क्या?्इनके हिसाब से पाप कर्रों और टंकी के पानी से मुँह धो किसी का खून करों ओर पियो,ओर मुख धो लो ओर सारी ज़िंदगी यही कर्रों पाखंडी जी,आप ये नर्हीं बोल रहे अपने अंधभरक्तों से की पाप कर्रों ही मत।पाखंड के ऊपर धर्म के जैसे चोले आपने ओढ़ रखे होते है वही अपने अंध भगतो को सिखा रहे हो,वा रे गुरुघंटाल ओर अंधभगतो।   तथाकथित ज्यादातर बाबाओ और इनके ही जेसे भगतो की ऐसी हालत हैे॰ये बाहर से देखने में ल्गेंगे धार्मिक और अंदर से वही अंधी कामनाओं स्वार्थो के कुत्ते भौक रहे होते है।जेसे कोई बाहर से देखने र्में लगे,शेर ओर अंदर से खुजलाता हुआ कुत्ता| यै ह्ौत्ी है लौकधार्मिकता ज्यादातर लोग हार्थों से पैर छुहते है देवी देवताओं भगवार्नों के,ओर मन से राक्षर्सों की पीठ चाटते है।मतलब अंधे स्वार्थो और कामनाओं की पूर्ति के लिए काम करते है,राक्षर्सों वाले। वाह री अंधी लोकधार्मिकता और सिखाते हैे॰ये सब आजकल के तथाकथित बाबा ओर पाखंडी गुरु।आज ही देखी एक बाबा की वीडियो जिसमे तथाकथित गुरु जी कह रहे थे,नल ओर कल का कोई भरोसा नर्हीं होता,जब तक टंकी ्में पानी है॰मुख लो और जब तक स्वास हैतब तक पाप धो लो।ज़िंदगी कब निकल जायेगी भरोसा नर्ही हे।ये बाबा पाखंड को छुपा गये क्या?्इनके हिसाब से पाप कर्रों और टंकी के पानी से मुँह धो किसी का खून करों ओर पियो,ओर मुख धो लो ओर सारी ज़िंदगी यही कर्रों पाखंडी जी,आप ये नर्हीं बोल रहे अपने अंधभरक्तों से की पाप कर्रों ही मत।पाखंड के ऊपर धर्म के जैसे चोले आपने ओढ़ रखे होते है वही अपने अंध भगतो को सिखा रहे हो,वा रे गुरुघंटाल ओर अंधभगतो।   तथाकथित ज्यादातर बाबाओ और इनके ही जेसे भगतो की ऐसी हालत हैे॰ये बाहर से देखने में ल्गेंगे धार्मिक और अंदर से वही अंधी कामनाओं स्वार्थो के कुत्ते भौक रहे होते है।जेसे कोई बाहर से देखने र्में लगे,शेर ओर अंदर से खुजलाता हुआ कुत्ता| - ShareChat