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#हर दिन #हरपल #दिवसः
हर दिन - அs अंग्रेजों के जव बहरे कानों को सुनाने के लिए हुए धमाके  पब्लिक सेफ्ट  ৪ সসল 1929  7#5 रस बम काड 1930 নিল' আা '২ मेभगत सिंट  की ढत्या को भगत सिह ओर ভিম্পুমে নিল சாஎன்ா ক সামন ৭ ম্যান टकश्यर  दत न दिल्लो को सेट्ल  নৈ কা বসন্ধম सिंह  ಹಹ ಗ सुखदेव  आर असेबली म बम  कातिकारिया ने सुनाई  रजगुरु को फांसी  বী মনা गे बम फेका था। गईथी। फका  को सजा सनाई गई। पा। बात 8 अप्रैल १९२९ की है। दिल्ली की सेंट्रल असेंबली में वायसराय ' पब्लिक सेफ्टी बिल ' पेश कर रहे थे। इसके बाद ये बिल कानून बनना था। दर्शक दीर्घा खचाखच भरी थी। जैसे ही बिल पेश किया गया, सदन में एक जोरदार धमाका हुआ| दो लोगों ने इंकलाब जिंदाबाद का नारा लगते हुए सदन के बीच में बम फेंका था। ये बम शहीद ए॰्आजम भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने फेंके थे। बम फेंकते समय इस बात का भी ध्यान रखा गया कि इससे किसी की जान का नुकसान न हो। जैसे ही बम  फटा, जोर की आवाज हुई और असेंबली हॉल में अंधेरा छा गया। पूरे भवन में अफरातफरी मच गई। घबराए लोगों ने बाहर भागना शुरू कर दिया। हालांकि बम फेंकने वाले दोनों क्रांतिकारी वहीं खड़े रहे। इंकलाब जिंदाबाद के नारे लगाते हुए उन्होंने कुछ पर्चे भी सदन में फेंके। इनमें लिखा " बहरे कानों को सुनाने के থা  लिए धमाकों की जरूरत पड़ती है। " दोनों ने खुद को पुलिस के हवाले कर दिया। इस कारनामे के बाद भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त भारतीय  के हीरो बन गए। युवाओं அs अंग्रेजों के जव बहरे कानों को सुनाने के लिए हुए धमाके  पब्लिक सेफ्ट  ৪ সসল 1929  7#5 रस बम काड 1930 নিল' আা '২ मेभगत सिंट  की ढत्या को भगत सिह ओर ভিম্পুমে নিল சாஎன்ா ক সামন ৭ ম্যান टकश्यर  दत न दिल्लो को सेट्ल  নৈ কা বসন্ধম सिंह  ಹಹ ಗ सुखदेव  आर असेबली म बम  कातिकारिया ने सुनाई  रजगुरु को फांसी  বী মনা गे बम फेका था। गईथी। फका  को सजा सनाई गई। पा। बात 8 अप्रैल १९२९ की है। दिल्ली की सेंट्रल असेंबली में वायसराय ' पब्लिक सेफ्टी बिल ' पेश कर रहे थे। इसके बाद ये बिल कानून बनना था। दर्शक दीर्घा खचाखच भरी थी। जैसे ही बिल पेश किया गया, सदन में एक जोरदार धमाका हुआ| दो लोगों ने इंकलाब जिंदाबाद का नारा लगते हुए सदन के बीच में बम फेंका था। ये बम शहीद ए॰्आजम भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने फेंके थे। बम फेंकते समय इस बात का भी ध्यान रखा गया कि इससे किसी की जान का नुकसान न हो। जैसे ही बम  फटा, जोर की आवाज हुई और असेंबली हॉल में अंधेरा छा गया। पूरे भवन में अफरातफरी मच गई। घबराए लोगों ने बाहर भागना शुरू कर दिया। हालांकि बम फेंकने वाले दोनों क्रांतिकारी वहीं खड़े रहे। इंकलाब जिंदाबाद के नारे लगाते हुए उन्होंने कुछ पर्चे भी सदन में फेंके। इनमें लिखा " बहरे कानों को सुनाने के থা  लिए धमाकों की जरूरत पड़ती है। " दोनों ने खुद को पुलिस के हवाले कर दिया। इस कारनामे के बाद भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त भारतीय  के हीरो बन गए। युवाओं - ShareChat