ShareChat
click to see wallet page
search
तुम जब भी आओगे मेरी उलझी हुई ज़िंदगी का सबूत माँगने तो काग़ज़ में लिखी दास्तानों से नहीं समझ पाओगे मेरे जिस्म में सूखती शिराओं का दर्द वर्षों से अपने आँगन में अकेली करती रही हूँ मैं अपनी ही परछाइयों से संवाद अपने ही पाँवों की आहट पर सुनती रही हूँ मैं, तुम्हारे आने की पदचापें कितना मुश्किल होता है अपने आप में अकेले होना राख़ के ढेर में अरमानों का दब जाना एकाकी संघर्षों में हथेलियों का घिस जाना तुम नहीं समझ पाओगे मेरी देह में उगी कटीली झाड़ियों की मार जिसे मैं वर्षों से झेल रही हूँ, अपने जिस्म पर देखती रही हूँ मैं वर्षों से घर लौटते पक्षियों की कतारों में तुम्हारे वापस आने की उम्मीदों के सपने तुम नहीं समझ पाओगे सूखे पत्तों सरीखे सड़कों पर बिखरे मेरे सपनों की पीड़ा और मेरी उम्मीदों के मर जाने का दर्द भी। #📃ਲਾਈਫ ਕੋਟਸ✒️ #📗ਸ਼ਾਇਰੀ ਅਤੇ ਕੋਟਸ 🧾 #🧾 ਟੈਕਸਟ ਸ਼ਾਇਰੀ #💓ਸਿਰਫ ਤੇਰੇ ਲਈ #👫ਮੈਂ ਤੇ ਓਹ
📃ਲਾਈਫ ਕੋਟਸ✒️ - तुम जब भी आओगे मेरी उलझी हुई जिंदगी का सबूत माँगने तो काग़ज़ में लिखी दास्तानों से नहीं समझ पाओगे मेरे जिस्म में सूखती शिराओं का दर्द। हिन्दीनामा নননা যুদা तुम जब भी आओगे मेरी उलझी हुई जिंदगी का सबूत माँगने तो काग़ज़ में लिखी दास्तानों से नहीं समझ पाओगे मेरे जिस्म में सूखती शिराओं का दर्द। हिन्दीनामा নননা যুদা - ShareChat