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#🌸 सत्य वचन #☝अनमोल ज्ञान #❤️जीवन की सीख #☝आज का ज्ञान #🙏 प्रेरणादायक विचार
🌸 सत्य वचन - चित्त पवित्र कैसे हो सकता है ? चित्त दूषित होता ही है। (  अपने आपको शरीर समझने से होना शरीर का ही चित्त का दूषित एक विकार है। से ही मुक्त हो जाओगे , जब आप शरीरभाव तो चित्त दूषित होने का प्रश्न ही नहीं। चित्त दूषित होता है विचारों से और विचार तो तभी आते हैं, जब आप अपने-आपको एक शरीर समझते हो। यानी अगर आप अपने आपको বক 3ামো মানী নী ন न शरीरभाव का प्रश्न है और न चित्त दूषित होने का प्रश्न है। चित्त पवित्र कैसे हो सकता है ? चित्त दूषित होता ही है। (  अपने आपको शरीर समझने से होना शरीर का ही चित्त का दूषित एक विकार है। से ही मुक्त हो जाओगे , जब आप शरीरभाव तो चित्त दूषित होने का प्रश्न ही नहीं। चित्त दूषित होता है विचारों से और विचार तो तभी आते हैं, जब आप अपने-आपको एक शरीर समझते हो। यानी अगर आप अपने आपको বক 3ামো মানী নী ন न शरीरभाव का प्रश्न है और न चित्त दूषित होने का प्रश्न है। - ShareChat