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#🖋शेरो-शायरी #✍गुलजारांचे साहित्य
🖋शेरो-शायरी - कल भी मुसाफ़िर था, आज भी मुसाफ़िर हूँ कल अपनों की तलाश में था 7 چا आज अपनी तालाश Gurat Saliab कल भी मुसाफ़िर था, आज भी मुसाफ़िर हूँ कल अपनों की तलाश में था 7 چا आज अपनी तालाश Gurat Saliab - ShareChat