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#⏳शब्द से शायरी: वक़्त
⏳शब्द से शायरी: वक़्त - 700 बचपन में झूठ - थे ताकि सब मान - मूठ रोते  जाए आज झूठ - मूठ हँसते हैं ताकि कोई सवाल ना करें 700 बचपन में झूठ - थे ताकि सब मान - मूठ रोते  जाए आज झूठ - मूठ हँसते हैं ताकि कोई सवाल ना करें - ShareChat