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#✒️ કવિની કલમ
✒️ કવિની કલમ - ममता दीदी अब तो कुर्सी से पीछा छोड़ ओ ममता दीदी बंगाल की जनता की इच्छा अब तो छोड़। लिये हर रिश्ता तोड़ दिया, कुर्सी के 377 नफ़रत के ये अफ़साने अब तो छोड़। वादों की बारिश में सपने बह गए, झूठे दिलासों का धंधा अब तो छोड़। गरीबों के घर आज भी अंधेरों में डूबे हैं सियासत का ये तमाशा अब तो छोड़। हर बात पे विरोध को दुश्मन कहा  377, आवाज़ों को दबाने का शौक अब तो छोड़। भी समझ रही है खेल सियासत का, তননা दिलों से खेलने की आदत अब तो छोड़। " प्रकाश" कहता है हक़ की सच्ची बात यहाँ, के नशे में रहना अब तो छोड़। HHI लिखित प्रकाश पंडित ममता दीदी अब तो कुर्सी से पीछा छोड़ ओ ममता दीदी बंगाल की जनता की इच्छा अब तो छोड़। लिये हर रिश्ता तोड़ दिया, कुर्सी के 377 नफ़रत के ये अफ़साने अब तो छोड़। वादों की बारिश में सपने बह गए, झूठे दिलासों का धंधा अब तो छोड़। गरीबों के घर आज भी अंधेरों में डूबे हैं सियासत का ये तमाशा अब तो छोड़। हर बात पे विरोध को दुश्मन कहा  377, आवाज़ों को दबाने का शौक अब तो छोड़। भी समझ रही है खेल सियासत का, তননা दिलों से खेलने की आदत अब तो छोड़। " प्रकाश" कहता है हक़ की सच्ची बात यहाँ, के नशे में रहना अब तो छोड़। HHI लिखित प्रकाश पंडित - ShareChat