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दिक्कालाद्यनवच्छिन्नाऽनन्तचिन्मात्रमूर्त्तये । स्वानुभूत्येकमानाय नमः शान्ताय तेजसे ।।🌷 🌿अर्थात् 🌿 जो दशों दिशाओं और तीनो कालों में परिपूर्ण है, जो अनन्त है, जो चैतन्य स्वरुप है, जो अपने ही अनुभव से जाना जा सकता है, जो शान्त और तेजोमय है, ऐसे ब्रह्मरूप परमात्मा को मैं नमस्कार करता हूँ ।🐝 #मेरी_पसंद_VD 🎶🎵