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kabir sahib ji - olod[ olel cdl वे सन् १३९८, विक्रमी संवत् १४५५ में, काशी के पवित्र लहरतारा तालाब में शिशु ' रूप में खिले कमल के पुष्प पर सशरीर प्रकट हुए थे। यह कोई सामान्य जन्म नहीं, बल्कि साक्षात्ू परमात्मा का प्राकट्य था। प्रमाणः ऋग्वेद मण्डल १०, सूक्त ४, मंत्र 3 न तस्य माता न पिता न बन्पुष न जन्म। 66 न कर्मणा न प्रजया धनेन त्यागेनके अमृतत्वमनशुः।। ३११ Rசda उस (पूर्ण परमात्मा ) की न माता हःन पिता हःन कोई 10 a बन्धु @ः न उसका जन्म होता ह। न वह कर्म से॰न प्रजया सआरनधनसे (पाप्त आता ७ . कवल त्याग से (उसकी प्राप्ति होती ह)। इस मंत्र में स्पष्ट है कि पूर्ण परमात्मा का जन्म नहीं होता, वह सशरीर प्रकट होता है। olod[ olel cdl वे सन् १३९८, विक्रमी संवत् १४५५ में, काशी के पवित्र लहरतारा तालाब में शिशु ' रूप में खिले कमल के पुष्प पर सशरीर प्रकट हुए थे। यह कोई सामान्य जन्म नहीं, बल्कि साक्षात्ू परमात्मा का प्राकट्य था। प्रमाणः ऋग्वेद मण्डल १०, सूक्त ४, मंत्र 3 न तस्य माता न पिता न बन्पुष न जन्म। 66 न कर्मणा न प्रजया धनेन त्यागेनके अमृतत्वमनशुः।। ३११ Rசda उस (पूर्ण परमात्मा ) की न माता हःन पिता हःन कोई 10 a बन्धु @ः न उसका जन्म होता ह। न वह कर्म से॰न प्रजया सआरनधनसे (पाप्त आता ७ . कवल त्याग से (उसकी प्राप्ति होती ह)। इस मंत्र में स्पष्ट है कि पूर्ण परमात्मा का जन्म नहीं होता, वह सशरीर प्रकट होता है। - ShareChat