ShareChat
click to see wallet page
search
#❤️जीवन की सीख #🙏 प्रेरणादायक विचार
❤️जीवन की सीख - srid बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के सिद्घांतों को सार्थक करने के लिए व्यक्तिगत, सामाजिक और संस्थागत स्तर पर ये प्रयास किए जा सकते हैं :- 1-शिक्षा को हथियार बनाना*1 खुद पढ़ो, दूसरों को पढ़ाओ*ः अंबेडकर मानते थे कि शिक्षा ही शोषण से मुक्ति का रास्ता अपने बच्चों, परिवार और समाज में शिक्षा को पहली प्राथमिकता दें | २- *ंतर्क और वैज्ञानिक सोच*ः अंधविश्वास छोड़कर सवाल पूछने और तर्क से सोचने की आदत डालें | *२. सामाजिक समता के लिए काम करना* *्जातिगत भेदभाव का विरोध* -अपने व्यवहार, शादी-विवाह, खान-्पान में जाति न देखें | 1- जहां भी छुआछूत या भेदभाव दिखे, शांतिपूर्ण तरीके से उसका विरोध करें | २- *सम्मान से जीना*ः खुद भी आत्मसम्मान से जिएं और ; को भी सम्मान दें | दूसरों ; अंबेडकर का नारा था "Educate Agitate, Organize" अन्याय के खिलाफ संगठित होकर आवाज उठाएं ३. संविधान के मूल्यों को अपनाना* *संवैधानिक कर्तव्य निभाना*: स्वतंत्रता , समता, बंधरुत्व और न्याय सिर्फ शब्द न रहें | 1- वोट सोच ्समझकर दें, कानून का पालन करें, भ्रष्टाचार का विरोध करें *अधिकारों के साथ कर्तव्य*ः -संविधान ने जो अधिकार दिए हैं उनकी रक्षा करें, 2- लेकिन साथ ही मौलिक कर्तव्यों को भी निभाएं | ४. आर्थिक और राजनीतिक सशक्तिकरण* *आर्थिक आत्मनिर्भरता*ः नौकरी के साथ-साथ स्वरोजगार,  स्किल डेवलपमेंट पर जोर दें अंबेडकर आर्थिक आजादी को सामाजिक आजादी की कुंजी मानते थे | राजनीति को गंदा कहकर दूर न रहें २- *राजनीतिक भागीदारी*: साफ सुथरे लोगों को चुनें और खुद भी नेतृत्व के लिए आगे आएं | के मूल सिद्घांत*ः ५. बौद्घ धम्म अंबेडकर ने समता , करुणा और प्रज्ञा के लिए बौद्घ धम्म अपनाया था हिंसा न करना, चोरी न करना, झूठ न बोलना, व्यभिचार न करना, नशा न करना पंचशील 1- को जीवन में उतारना | अंबेडकर को सिर्फ जयंती पर याद करना काफी नहीं | सबसे जरूरी बात उनके सिद्घांत रोज के व्यवहार में दिखने चाहिए | जैसा उन्होंने कहा था "मैं ऐसे धर्म को मानता हूँ जो स्वतंत्रता, समता और बंधुत्व सिखाता है ।" srid बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के सिद्घांतों को सार्थक करने के लिए व्यक्तिगत, सामाजिक और संस्थागत स्तर पर ये प्रयास किए जा सकते हैं :- 1-शिक्षा को हथियार बनाना*1 खुद पढ़ो, दूसरों को पढ़ाओ*ः अंबेडकर मानते थे कि शिक्षा ही शोषण से मुक्ति का रास्ता अपने बच्चों, परिवार और समाज में शिक्षा को पहली प्राथमिकता दें | २- *ंतर्क और वैज्ञानिक सोच*ः अंधविश्वास छोड़कर सवाल पूछने और तर्क से सोचने की आदत डालें | *२. सामाजिक समता के लिए काम करना* *्जातिगत भेदभाव का विरोध* -अपने व्यवहार, शादी-विवाह, खान-्पान में जाति न देखें | 1- जहां भी छुआछूत या भेदभाव दिखे, शांतिपूर्ण तरीके से उसका विरोध करें | २- *सम्मान से जीना*ः खुद भी आत्मसम्मान से जिएं और ; को भी सम्मान दें | दूसरों ; अंबेडकर का नारा था "Educate Agitate, Organize" अन्याय के खिलाफ संगठित होकर आवाज उठाएं ३. संविधान के मूल्यों को अपनाना* *संवैधानिक कर्तव्य निभाना*: स्वतंत्रता , समता, बंधरुत्व और न्याय सिर्फ शब्द न रहें | 1- वोट सोच ्समझकर दें, कानून का पालन करें, भ्रष्टाचार का विरोध करें *अधिकारों के साथ कर्तव्य*ः -संविधान ने जो अधिकार दिए हैं उनकी रक्षा करें, 2- लेकिन साथ ही मौलिक कर्तव्यों को भी निभाएं | ४. आर्थिक और राजनीतिक सशक्तिकरण* *आर्थिक आत्मनिर्भरता*ः नौकरी के साथ-साथ स्वरोजगार,  स्किल डेवलपमेंट पर जोर दें अंबेडकर आर्थिक आजादी को सामाजिक आजादी की कुंजी मानते थे | राजनीति को गंदा कहकर दूर न रहें २- *राजनीतिक भागीदारी*: साफ सुथरे लोगों को चुनें और खुद भी नेतृत्व के लिए आगे आएं | के मूल सिद्घांत*ः ५. बौद्घ धम्म अंबेडकर ने समता , करुणा और प्रज्ञा के लिए बौद्घ धम्म अपनाया था हिंसा न करना, चोरी न करना, झूठ न बोलना, व्यभिचार न करना, नशा न करना पंचशील 1- को जीवन में उतारना | अंबेडकर को सिर्फ जयंती पर याद करना काफी नहीं | सबसे जरूरी बात उनके सिद्घांत रोज के व्यवहार में दिखने चाहिए | जैसा उन्होंने कहा था "मैं ऐसे धर्म को मानता हूँ जो स्वतंत्रता, समता और बंधुत्व सिखाता है ।" - ShareChat