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#शायरी📜 सिमट जाती हैं तमन्नाएँ तहज़ीब की हदों में, वरना इश्क़ तो आँखों से भी इकरार कर लेता है। ख़्वाहिशें कभी बेज़ुबान नहीं होतीं, बस उन्हें ख़ामोश रहने का सलीका आ जाता है
शायरी📜 - बिछड़े भी नहीं, मिले भी नहीं, अजीब फूल थे, खिले भी नहीं.. !" बिछड़े भी नहीं, मिले भी नहीं, अजीब फूल थे, खिले भी नहीं.. !" - ShareChat