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#*let us understand our religion #islam guide us in every field of life #*આપણે વિચારીશું ખરા?* #points to ponder #सोचने वाली बात
*let us understand our religion - *নর্নী (৬৮) ন ক্রমোত্রাঃ* "তী कोई भी यह चाहता है कि उसकी जीविका (धन दौलत) में बरकत दी जाए और ६उसकी आयु लंबी की जाए, तो उसे अपने रिश्तेदारों के साथ अच्छे संबंध रखने चाहिए।" *संदर्भः* सहीह अल-बुखारी  5985 (३) आपसी भाईचारा और মীল-মিলাব *अल्लाह के रसूल (७ls) ने কংমাযাঃ* "एक-दूसरे से संबंध न तोड़ें, न ही एकनदूसरे से पीठ फेरें, न एक॰दूसरे से नफरत करें और न ही एक॰दूसरे से ईर्ष्या (जलन) कररें। ऐ अल्लाह के बंदों! भाई-्भाई बन कर रहो। किसी मुसलमान के लिए यह जायज नहीं है कि वह अपने भाई (मुसलमान) से तीन दिन से ज्यादा बातचीत बंद रखे (नाता तोड़े रखे)।" *संदर्भः* जामी अतनतिर्मिज़ी *নর্নী (৬৮) ন ক্রমোত্রাঃ* "তী कोई भी यह चाहता है कि उसकी जीविका (धन दौलत) में बरकत दी जाए और ६उसकी आयु लंबी की जाए, तो उसे अपने रिश्तेदारों के साथ अच्छे संबंध रखने चाहिए।" *संदर्भः* सहीह अल-बुखारी  5985 (३) आपसी भाईचारा और মীল-মিলাব *अल्लाह के रसूल (७ls) ने কংমাযাঃ* "एक-दूसरे से संबंध न तोड़ें, न ही एकनदूसरे से पीठ फेरें, न एक॰दूसरे से नफरत करें और न ही एक॰दूसरे से ईर्ष्या (जलन) कररें। ऐ अल्लाह के बंदों! भाई-्भाई बन कर रहो। किसी मुसलमान के लिए यह जायज नहीं है कि वह अपने भाई (मुसलमान) से तीन दिन से ज्यादा बातचीत बंद रखे (नाता तोड़े रखे)।" *संदर्भः* जामी अतनतिर्मिज़ी - ShareChat