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#📗प्रेरक पुस्तकें📘 #💔दर्द भरी कहानियां #✍️ साहित्य एवं शायरी #😒दर्द भरी शायरी🌸
📗प्रेरक पुस्तकें📘 - 'ক্তুম্ভ মুসহী, कुछ गुजार दी॰! 38 Fa; कुँछ निखार दी.! कुछ बिगड़ी , बिगाड़ दी॰! 38 कुछ अपनी रही, कुछ अपनों पर वार दी॰! कुछ इश्क़ में डूबी,  कुॅछ इश्क़ ने तार दी॰! कुछ दोस्त साथ रहे ने उतार दी.! कुछ कसर दुश्मनों बस... ज़िन्दगी जैसी मिली, ज़िन्दगी वैसी ही गुज़ार दी..' 'ক্তুম্ভ মুসহী, कुछ गुजार दी॰! 38 Fa; कुँछ निखार दी.! कुछ बिगड़ी , बिगाड़ दी॰! 38 कुछ अपनी रही, कुछ अपनों पर वार दी॰! कुछ इश्क़ में डूबी,  कुॅछ इश्क़ ने तार दी॰! कुछ दोस्त साथ रहे ने उतार दी.! कुछ कसर दुश्मनों बस... ज़िन्दगी जैसी मिली, ज़िन्दगी वैसी ही गुज़ार दी..' - ShareChat