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#📒 मेरी डायरी #❤️जीवन की सीख
📒 मेरी डायरी - ८० अब मैं उस मुक़ाम पर हूं जहाँ शिकायतें न वक़्त से हैं, न लोगों से। क्योंकि भ्रम टूट चुके हैं, और स्वार्थ का वास्तविक स्वरूप दिखाई देने लगा है। स्पष्ट किसी के बदल जाने पर अब नहीं होता, आश्चर्य - आख़िर मनुष्य निष्ठा से अधिक सुविधा का उपासक जो ठहरा।  ८० अब मैं उस मुक़ाम पर हूं जहाँ शिकायतें न वक़्त से हैं, न लोगों से। क्योंकि भ्रम टूट चुके हैं, और स्वार्थ का वास्तविक स्वरूप दिखाई देने लगा है। स्पष्ट किसी के बदल जाने पर अब नहीं होता, आश्चर्य - आख़िर मनुष्य निष्ठा से अधिक सुविधा का उपासक जो ठहरा। - ShareChat