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#🌹 सुविचार 🌹
🌹 सुविचार 🌹 - कलयुग का कड़वा सच ! सिंहासन खाली था। पिता का "अयोध्या का आदेश था। चाहते तो राजा बन सकते थे, कोई रोकने भरत वाला नहीं था। लेकिन उन्होंने राम के हक को हाथ नहीं लगाया। आज के कलयुग में देखो... भाई-भाई एक मकान और दुकान के लिए कोर्टन्कचहरी में लड़ रहे हैं। भरत ने सिखाया कि रिश्तों की कीमत 'जायदाद' से बड़ी होती है। राज्य तो मिल जाता, पर 'राम जैसा भाई' खो जाता। दौलत तो फिर कमाई जा सकती है, पर भाई का भाई का प्यार बाज़ार में नहीं मिलता। " कलयुग का कड़वा सच ! सिंहासन खाली था। पिता का "अयोध्या का आदेश था। चाहते तो राजा बन सकते थे, कोई रोकने भरत वाला नहीं था। लेकिन उन्होंने राम के हक को हाथ नहीं लगाया। आज के कलयुग में देखो... भाई-भाई एक मकान और दुकान के लिए कोर्टन्कचहरी में लड़ रहे हैं। भरत ने सिखाया कि रिश्तों की कीमत 'जायदाद' से बड़ी होती है। राज्य तो मिल जाता, पर 'राम जैसा भाई' खो जाता। दौलत तो फिर कमाई जा सकती है, पर भाई का भाई का प्यार बाज़ार में नहीं मिलता। " - ShareChat